बुढ़ापे में अपनों का दर्द लेकर कचहरी दौड़ रहे हैं मां-बाप

Updated at : 08 Nov 2019 6:01 AM (IST)
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बुढ़ापे में अपनों का दर्द लेकर कचहरी दौड़ रहे हैं मां-बाप

पंकज कुमार, बक्सर : ‘गम न देखा कोई बुढ़ापा का, मर गये शुक्र है जवानी में’ नोमान फारूक का यह शेर बुढ़ापे के दर्द को बयां कर रहा है. यदि इस दर्द को करीब से देखना है तो आप जिले के अनुमंडल कार्यालय में घूम सकते हैं. वहां आंखों में बेटों के साथ रहने की […]

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पंकज कुमार, बक्सर : ‘गम न देखा कोई बुढ़ापा का, मर गये शुक्र है जवानी में’ नोमान फारूक का यह शेर बुढ़ापे के दर्द को बयां कर रहा है. यदि इस दर्द को करीब से देखना है तो आप जिले के अनुमंडल कार्यालय में घूम सकते हैं. वहां आंखों में बेटों के साथ रहने की उम्मीद लिए भटकते हुए बूढ़ों को देख सकते हैं.

यह दर्द उन लोगों का है, जिन्होंने जवानी में अपने बेटों की परवरिश के लिए खून-पसीने बहायें और दुखों को बिना बतायें वे पी लिये. लेकिन, जब बात बुढ़ापे में मां-बाप की सेवा की आयी तो उन्हीं बच्चों ने उन्हें बोझ समझकर घर से बाहर का रास्ता दिखलाया है.
कोर्ट-कचहरी से जीवन भर दूर रहने वाले लोगों को शायद यह पता न था कि जीवन की आखिरी घड़ी में उन्हें अपने बेटों के साथ ही मुकदमे लड़ने पड़ेंगे. आपको बता दें कि केवल बक्सर अनुमंडल में वर्ष 2017-19 में अब तक करीब पंद्रह सौ मामले आ चुके हैं. इन सभी मामलों में अधिकांश की सुनवाई हो चुकी है. हाल-फिलहाल वाले मामलों में सुनवाई चल रही है. इस मामले में अंतिम रूप से एसडीओ द्वारा भरण पोषण के लिए भत्ता तक निर्धारित की जाती है.
कर्ज लेकर पहुंचते हैं अनुमंडल कार्यालय
कचहरी में उनके बेटों की उपस्थिति नहीं होने के कारण अनुमंडल में सुनवाई के लिए आगे की तिथि रखी जाती है. बेटों की यह करतूत जानबूझ कर होती है. वे इस मामले में उपस्थित नहीं होना चाहते हैं. ऐसे में मां-बाप भी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलने के बाद भी आखिरी उम्मीद की आशा नहीं झोड़ते हैं और अंतत: बेटों पर अनुमंडलाधिकारी द्वारा कार्रवाई की जाती है.
संपत्ति से वंचित हो सकती हैं संतान
डीएलएसए की पैनल अधिवक्ता दीपिका केसरी ने कहा कि भरण-पोषण अधिनियम 2007 के तहत हर बूढ़े व्यक्ति को बेटों द्वारा भरण पोषण का अधिकार है. ऐसे में यदि इस कानून का कोई उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश भी है और सजा का भी प्रावधान है.
मां-बाप चाहे तो ऐसे बेटों को अपनी संपत्ति से वंचित किया जा सकता है.
केस 1
बाबा नगर की रहने वाली महरी देवी के बेटे मां के साथ बुरा व्यवहार कर रहे थे. घर के शौचालय में प्रवेश से भी वंचित करना चाहते थे. पूरी तरह प्रताड़ित करते थे. इसकी लिखित सूचना अनुमंडल कार्यालय में महरी देवी ने की. जिसके बाद अनुमंडलाधिकारी ने सुनवाई किये.
केस 2
मोहरिया धनसोई की रहने वाली चनमुना देवी ने अपने बेटों पर आरोप लगाते हुए अनुमंडल में आवेदन दिया है कि उनके दो बेटे हैं, जो उनका ख्याल तक नहीं रखते. न तो खाना देते हैं और न ही तबीयत खराब होने के बाद उनका इलाज. ऐसे में वे अपनी पीड़ा एसडीओ से बतायी.
केस 3
खलासी मुहल्ला की सुदमीया देवी भी अपने बेटों से परेशान थी. इसकी लिखित शिकायत करते हुए वे एसडीओ को अपनी प्रताड़ना की जानकारी दी. जिसके बाद इस मामले की सुनवाई हुई और आज उनके बेटे द्वारा भरण-पोषण का खर्च दिया जा रहा है.
दे सकते हैं आवेदन
यदि कोई बुजुर्ग अपने बेटों से प्रताड़ित है तो वह अनुमंडल कार्यालय में आवेदन दे सकता है. यहां आवेदन दिये जाने के बाद मामले की जांच होती है फिर कार्रवाई की जाती है. बुजुर्गों के सहयोग के लिए जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बुनियाद केंद्र एवं अन्य संस्थाने शामिल हैं.
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