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ऑपरेशन सिंदूर में शहीद सुनील यादव को मिला मरणोपरांत सेना मेडल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बक्सर-चौसा नगर अंतर्गत नरबतपुर निवासी शहीद हवलदार सुनील कुमार सिंह को भारतीय सेना ने मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया है.

चौसा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बक्सर-चौसा नगर अंतर्गत नरबतपुर निवासी शहीद हवलदार सुनील कुमार सिंह को भारतीय सेना ने मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया है. राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित 78वें सेना दिवस समारोह में सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अदम्य साहस दिखाने वाले शहीदों को यह सम्मान प्रदान किया. जब शहीद सुनील सिंह के अदम्य साहस का उल्लेख हुआ और उनका नाम पुकारा गया, तो उनकी पत्नी सुजाता देवी सम्मान ग्रहण करते समय भावुक हो उठीं. सेना द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, हवलदार सुनील कुमार सिंह 27 मई 2024 से 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी में तैनात थे. 9 मई 2025 की रात पाकिस्तान की ओर से वर्कशॉप क्षेत्र पर भीषण गोलाबारी की गई. दो दिशाओं से लगातार हो रही फायरिंग के बीच भी उन्होंने धैर्य और सतर्कता नहीं छोड़ी. करीब रात 1:10 बजे उन्होंने अपनी सेंट्री पोस्ट की ओर छह पाकिस्तानी ड्रोन आते देखे और तत्काल खतरे की सूचना दी. अपनी जान की परवाह किए बिना खुले में आकर उन्होंने राइफल से ड्रोन पर फायर शुरू कर दिया. इसी दौरान दुश्मन देश की तोप का गोला उनकी सेंट्री पोस्ट के ऊपर फटा, जिससे निकले छरों से वे गंभीर रूप से घायल हो गए. बावजूद इसके, हवलदार सुनील कुमार सिंह अंतिम क्षणों तक दुश्मन ड्रोन की सटीक जानकारी अपने साथियों को देते रहे. उनकी सूझबूझ और साहस से भारतीय सेना ने ड्रोन को निशाना बनाया और कई जवानों की जान बच सकी. साथियों की सुरक्षा के लिए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया. इसी अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया. बतादें कि चौसा नरबतपुर के शहीद सुनील सिंह, जनार्दन सिंह के बड़े पुत्र थे. उनके परिवार में देश सेवा की परंपरा जीवित है. छोटा भाई चंदन कुमार भी सेना में कार्यरत है, जबकि मंझला भाई अनिल कुमार माता-पिता की सेवा और खेती-बाड़ी संभालते हैं. उनकी माता पावढारो देवी सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं. बक्सर के इस वीर सपूत के सम्मान से पूरा जिला गौरवान्वित है. शहीद सुनील सिंह का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देता रहेगा. ग्रामीण, समाजसेवियों और प्रबुद्धजनों ने वीर सपूत को मरणोपरांत सेना द्वारा सम्मान दिए जाने पर गर्व का क्षण बताया है.

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