साढ़े तीन साल की ''निर्भया'' से दुष्कर्म और हत्या मामले में बक्सर के युवक को सूरत में फांसी की सजा, जज ने कहा...

Updated at : 01 Aug 2019 2:32 PM (IST)
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साढ़े तीन साल की ''निर्भया'' से दुष्कर्म और हत्या मामले में बक्सर के युवक को सूरत में फांसी की सजा, जज ने कहा...

बक्सर : साढ़े तीन साल की बच्ची को अगवा कर घर में दुष्कर्म करने और हत्या कर दिये जाने के मामले में बक्सर जिला निवासी युवक को सूरत में फांसी की सजा सुनायी गयी है. बताया जाता है कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित युवक ने बच्ची के सिर पर डंडे से प्रहार […]

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बक्सर : साढ़े तीन साल की बच्ची को अगवा कर घर में दुष्कर्म करने और हत्या कर दिये जाने के मामले में बक्सर जिला निवासी युवक को सूरत में फांसी की सजा सुनायी गयी है. बताया जाता है कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित युवक ने बच्ची के सिर पर डंडे से प्रहार कर गला घोंट कर मार दिया था. इसके बाद आधी रात को सूरत से फरार होकर गांव भाग गया था.

जानकारी के मुताबिक, बक्सर जिले के धनसोई निवासी 24 वर्षीय अनिल यादव को साढ़े तीन साल की बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म कर हत्या करने के मामले में फांसी की सजा सुनायी गयी है. बताया जाता है कि 14 अक्टूबर, 2018 को सूरत के लिंबायत थाना क्षेत्र के घोड़ादरा स्थित अपने घर के पास रहनेवाली साढ़े तीन की मासूम बच्ची को अगवा कर अपने घर में बंद कर लिया. उसके बाद बच्ची से दुष्कर्म के साथ-साथ अप्राकृतिक कृत्य भी किया. बाद में उसके सिर पर डंडे से हमला कर गला घोंट दिया. हत्या किये जाने के बाद शव को थैले में रख कर आधी रात को ही बिहार चला गया. घटना के दूसरे दिन 15 अक्टूबर को बच्ची का शव बरामद किया गया. बच्ची मिलने के चार दिन बाद 19 अक्तूबर को पुलिस ने अनिल को बिहार के बक्सर जिले के धनसोई से गिरफ्तार कर लिया और सूरत ले गयी.

पब्लिक प्रोसिक्यूटर नयन सुक्खड़वाला के मुताबिक, मामले में 37 गवाहों के बयान दर्ज किये गये. मामले में फॉरेंसिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट सबूत के तौर पर पेश किये गये. फोरेंसिक पोस्टमार्टम में बताया गया कि वारदात 14 अक्टूबर, 2018 को रात करीब डेढ़ बजे हुई थी. रेप और अप्राकृतिक कृत्य के साथ-साथ सिर और गले पर चोट के निशान मिले हैं. बच्ची के दोनों प्राइवेट पार्ट में चोटें थीं. फैसला सुनाते समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडीजे) पीएस काला ने टिप्पणी की कि पुराने जमाने में बच्चों को उठाकर राक्षस ले जाते थे. यह तो राक्षसों से भी घिनौना कृत्य है. इस कारण आरोपित को उम्रकैद नहीं, फांसी की सजा देना ही उचित है.

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