समय हुआ पूरा, नहीं तैयार हुआ मलई बराज
Updated at : 20 Jul 2017 12:24 PM (IST)
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बक्सर : जिले के नावानगर प्रखंड क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित मलई नदी पर बराज बनाने की प्रक्रिया चल रही है. बराज को 30 जून तक बना कर तैयार करना था. इसके निर्माण में आयी गड़बड़ी के कारण समय पर बराज निर्माण नहीं हो पाया. इसे बनाने में सरकार की ओर से करीब 58 […]
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बक्सर : जिले के नावानगर प्रखंड क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित मलई नदी पर बराज बनाने की प्रक्रिया चल रही है. बराज को 30 जून तक बना कर तैयार करना था. इसके निर्माण में आयी गड़बड़ी के कारण समय पर बराज निर्माण नहीं हो पाया. इसे बनाने में सरकार की ओर से करीब 58 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा. बराज के नहीं बनने से करीब 16 सौ हेक्टेयर की भूमि सिंचाई से वंचित रह जा रही है. इससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यदि इस क्षेत्र में सिंचाई बेहतर तरीके से हो तो धान की पैदावार में बढ़ोतरी होने की संभावना है. यह क्षेत्र धान के कटोरे के रूप में जाना जाता है. बराज के शुरू हो जाने से डुमरांव रजवाहा, भोजपुर रजवाहा, केसठ रजवाहा सहित अन्य नहरों में पानी आ जायेगा.
नहीं बन पा रहा था बराज: मलई बराज बनाने के लिए वर्ष 1957 में मुद्दा उठा था, लेकिन यह सिर्फ राजनीति का मुद्दा ही बनकर रह गया. वर्ष 1984 में इसे बनाने के लिए टेंडर निकाला गया. टेंडर निकाले जाने के बाद संवेदक व विभागीय लापरवाही के कारण मलई बराज निर्माण योजना अधर में रह गयी.
इसके बाद वर्ष 2010 में इसके निर्माण की पहल की गयी. इसके बाद वर्ष 2013 में निर्माण के लिए 58 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया. वर्ष 2015 में निर्माण की जैसे ही प्रक्रिया शुरू हुई वैसे ही पड़ोसी जिला रोहतास के किसानों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. कार्य कर रहे कर्मियों के साथ मारपीट भी की. कर्मियों ने कार्य करने से मना कर दिया. इसके बाद प्रशासन की पहल पर निर्माण स्थल के पास एक पुलिस पिकेट बनाया गया. जिसमें एक सेक्शन फोर्स रखा गया. तब जाकर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई
किसानों को हो रही परेशानी: मलई बराज से डुमरांव रजवाहा, भोजपुर रजवाहा, केसठ रजवाहा सहित अन्य नहरें जुड़ी हुई है. इन नहरों से करीब सोलह सौ हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती. साथ ही करीब 5825 क्यूसेक पानी इन नहरों को आसानी से मिल पाता. बराज नहीं बनने से इन नहरों में रोटेशन के अनुसार पानी आता है. जिससे टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है, जिससे कई किसानों के खेतों में पानी पहुंच पाता है. मजबूरीवश किसान डीजल पंप सेट से खेती करने पर मजबूर होते हैं. यदि इसका निर्माण हो जाये, तो धान की बेहतर पैदावार होगी.
दो पिलर हुए ध्वस्त
संवेदक की ओर से तेजी से बराज के निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी. इसी बीच पिछले वर्ष तेज बारिश और आयी बाढ़ के दौरान बराज में तेजी से पानी आया. जिससे दो पिलर अपने स्थान से खिसक गया, जिससे प्रशासन की ओर से होश उड़ गये. मलई बराज निर्माण में लगे कार्यपालक अभियंता ने संवेदक को तत्काल दोनों पिलर को तोड़ते हुए पुन: निर्माण करने का आदेश दिया. साथ ही अन्य कार्यों पर पैनी नजर रखी जाने लगी. विभागीय अभियंताओं से मिली जानकारी के अनुसार दो पिलर के खिसकने के कारण बराज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है.
क्या कहते हैं अभियंता
बराज निर्माण के लिए संवेदक को सख्त निर्देश दिया गया है. ताकि कार्य को शीघ्र पूरा करें. साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा रही. इसके निर्माण से किसानों को काफी राहत मिलेगा.
धीरेंद्र कुमार, सहायक अभियंता, मलई बराज
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