प्रभु श्रीराम ने रामेश्वर, तो ब्रह्मा ने की थी ब्रह्मेश्वरनाथ की स्थापना
Updated at : 10 Jul 2017 6:19 AM (IST)
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मिनी काशी के नाम से जाना जाता है बक्सर मिनी बाबाधाम के नाम से मशहूर है ब्रह्मपुर धाम बक्सर : शिव की महिमा अपरंपार है. कहा जाता है कि त्रिनेत्र औघड़दानी बाबा भोले शंकर जिस पर प्रसन्न हो जाएं, उसका जीवन धन्य हो जाता है. महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और मिनी काशी के नाम से […]
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मिनी काशी के नाम से जाना जाता है बक्सर
मिनी बाबाधाम के नाम से मशहूर है ब्रह्मपुर धाम
बक्सर : शिव की महिमा अपरंपार है. कहा जाता है कि त्रिनेत्र औघड़दानी बाबा भोले शंकर जिस पर प्रसन्न हो जाएं, उसका जीवन धन्य हो जाता है. महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और मिनी काशी के नाम से प्रसिद्ध बक्सर जिला का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है. बक्सर में श्री रामेश्वरनाथ मंदिर भी धार्मिक धरोहरों में एक है. यहां रामेश्वर नाथ महादेव के दर्शन और पूजन के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी भक्त आते हैं. अति प्राचीनतम इस मंदिर की व्याख्या धार्मिक ग्रंथों में भी पढ़ने और सुनने को मिलता है. भगवान श्री राम ने इस मंदिर की स्थापना अपने हाथों से की. वहीं, मिनी बाबाधाम के नाम से मशहूर ब्रह्मपुर नगरी में विराजमान बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ महादेव की स्थापना सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने स्वयं के हाथों से की थी. ये दोनों मंदिर शिव के उपज्योतिर्लिंग में गिने जाते हैं.
13 लाख वर्ष पूर्व हुई थी शिवलिंग की स्थापना : गंगा के तट पर रामरेखा घाट किनारे स्थित श्री रामेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास लगभग 13 लाख वर्ष पूर्व का है. इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी. कहा जाता है कि वनवास के दौरान राम ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए रामेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना की. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से पवित्र गंगा में स्नान करने के बाद जो भक्त रामेश्वरनाथ यानी शंकर भगवान दर्शन करता है, उस पर लगा ब्रह्महत्या जैसा पाप भी मिट जाता है.
ऐसे हुआ रामरेखा घाट का नामकरण : जानकारों की मानें, तो जब ऋषि महर्षियों की तपस्या में राक्षस खलल डालने लगे, तब भगवान श्री राम ने दानवों के गमन पर रोक लगाने के लिए एक रेखा खींची ताकि. चारों दिशाओं सहित आकाश और पाताल के रास्ते भी यहां राक्षसों का प्रवेश नहीं हो सके. उसी रेखा के कारण इस जगह का नाम रामरेखा घाट पड़ा. रामेश्वरनाथ मंदिर भक्तों के लिए एक बड़ा आस्था का केंद्र है.
सृष्टि के रचयिता ने बनवाया ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर : बक्सर से लगभग 40 किलोमीटर की दूर स्थित बाबा बरमेश्वरनाथ मंदिर अपनी भव्यता व प्राचीनता के लिए पूरे देश में विख्यात है. यहां स्वयंभू शिवलिंग की स्थापना 14वीं सदी में स्वयं ब्रह्मा जी ने अपने हाथों से किया था. किवंदतीयों के आधार पर स्थानीय लोग कहते हैं कि एकबार मुसलिम शासक नादिर शाह ने इस मंदिर को तोड़ने के लिए अपनी फौज के साथ धावा बोला था, लेकिन मंदिर के पुजारियों के अनुनय-विनय के पश्चात नादिर शाह ने इस शर्त पर उनकी बात मानी थी कि, अगर तुम्हारे भगवान में सत्यता है तो उनसे कहों कि मंदिर का दरवाजा रात भर में पूरब से पश्चिम हो जाये. रातोंरात सच में ऐसा चमत्कार हो गया है. अगली सुबह मंदिर का दरवाजा पूरब से पश्चिम की ओर हो गया. ऐसी मान्यता है कि विश्व में एकमात्र शिवमंदिर है, जो पश्चिमाभिमुख है.
शिवसागर तालाब में स्नान से कष्टमुक्ति : मंदिर के पूरब भाग में एक बहुत बड़ा तालाब अवस्थित है, जिसे शिवसागर तालाब के नाम से जाना जाता है. इस तालाब का वर्णन स्कंद पुराण व शिव महात्मय आदि ग्रंथों में भी मिलता है, जो इसके प्राचीनता का परिचायक है. ऐसी मान्यता है कि शिव सागर तालाब में स्नान कर इसका जल शिवलिंग पर चढ़ाने से कुष्ठरोग सहित कई प्रकार के चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है.
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