जिले में बिना निबंधन के ही चल रहीं नावें, हादसे का बना है डर

Updated at : 09 Jul 2017 6:28 AM (IST)
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जिले में बिना निबंधन के ही चल रहीं नावें, हादसे का बना है डर

नावों पर मानक के अनुरूप सुरक्षा का प्रबंध नहीं नाव हादसों से सबक नहीं ले रहा है प्रशासन बक्सर : हर साल बाढ़ के दौरान गंगा नदी में नाव दुर्घटना होती है. इसके बावजूद बक्सर में नियमों की अनदेखी हो रही है. गंगा नदी व इसके सहायक नदियों में जिले में पांच हजार से अधिक […]

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नावों पर मानक के अनुरूप सुरक्षा का प्रबंध नहीं

नाव हादसों से सबक नहीं ले रहा है प्रशासन
बक्सर : हर साल बाढ़ के दौरान गंगा नदी में नाव दुर्घटना होती है. इसके बावजूद बक्सर में नियमों की अनदेखी हो रही है. गंगा नदी व इसके सहायक नदियों में जिले में पांच हजार से अधिक मालवाहक, यात्री वाहक तथा मछली मारनेवाली नावों का परिचालन वर्तमान समय में हो रहा है, लेकिन नावों का निबंधन नहीं कराया गया है. नावों पर मानक के अनुरूप सुरक्षा का प्रबंध नहीं है. नाव संचालन के लिए प्रशिक्षित नाविक नहीं हैं. अकुशल तथा अप्रशिक्षित लोगों के द्वारा नावों का परिचालन किया जा रहा है.
नावों पर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठा कर सफर भी कराया जा रहा है. मालवाहक नावों पर भी क्षमता से अधिक लदान किया जा रहा है. सरकारी आदेश के बावजूद नदी में रात के अंधेरे में मछली मारनेवाली नावों का परिचालन मछुआरों द्वारा वर्तमान समय में किया जा रहा है. इसके प्रति प्रशासन उदासीन है. नियमों की अनदेखी करनेवाले नाव परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है.
नियमों की हो रही अनदेखी : बक्सर शहर और आस-पास के गंगा नदी के घाटों पर उसपार से बालू लेकर आनेवाली नावों पर क्षमता से अधिक लदान हो रहा है. रामरेखा घाट से उजियार घाट के अलावा यूपी के अन्य गांवों को जानेवाली नावों पर यात्रियों को भी क्षमता से अधिक बैठाया जा रहा है. इन नावों पर मानक के अनुरूप सुरक्षा का प्रबंध नहीं है तथा नावों का निबंधन भी नहीं कराया गया है. निबंधन के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच अंचल पदाधिकारी और मोटरयान निरीक्षक को करना है.
इन स्थानों पर होता है नावों का परिचालन : गंगा नदी में बक्सर से लेकर चौसा तक व ब्रह्मपुर क्षेत्र के दियारा से लेकर नदी के छाड़न में बलियां जिले के विभिन्न घाटों तक जानेवाली जिले में एक भी नाव निबंधित नहीं है. इन घाटों पर चलनेवाली नौकाओं की दशा क्या है, इसे देखने सुननेवाला कोई नहीं. इस पार व उस पार के रोजाना कार्यों के अलावा मुंडन संस्कार के लिए हजारों नर नारियों की भीड़ प्रत्येक शुभ मुहूर्त के दिन घाटों पर उमड़ पड़ रही है.
ऐसी स्थिति में पुरानी नावों पर क्षमता से अधिक लोगों की भीड़ का सवार होना खतरे को आमंत्रित करने जैसा है. घाटों से क्षमता से अधिक सवारी बोझ कर नदी पार कराना नाव वालों की आदत में शुमार है. विडंबना यह कि किसी बड़े हादसे का संदेश दे रही इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए किसी भी स्तर पर कोई पहल नहीं हो रही है.
क्या है नाव निबंधन के नियम
नदी में नावों का परिचालन करने के लिए बंगाल फेरी घाट के तर्ज पर बनाये गये नाव निबंधन अधिनियम के तहत नावों का निबंधित कराना है. नावों का निबंधन करने के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी सक्षम प्राधिकार है. अंचल पदाधिकारी, मोटर यान निरीक्षक, जिला परिवहन पदाधिकारी और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के अधिकारी नावों के परिचालन की जांच करने तथा नियम का उल्लंघन करनेवालों के खिलाफ जुर्माना करने के लिए अधिकृत हैं.
शिविर लगा होगा नावों का निबंधन
निबंधन के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच अंचल पदाधिकारी और मोटरयान निरीक्षक करेंगे. बिना निबंधन के नाव परिचालन करनेवालों की जांच करने का निर्देश अंचल पदाधिकारी और मोटरयान निरीक्षक को दिया गया है. शिविर लगाकर नावों का निबंधन किया जायेगा.
दिवाकर झा, जिला परिवहन पदाधिकारी, बक्सर
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