बक्सर के कई प्रखंड सूखाग्रस्त, बारिश के इंतजार कर रहे मायूस किसानों ने कहा- अच्छी पैदावार की उम्मीद नहीं
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Aug 2022 5:55 AM
बक्सर के किसानों ने कहा कि इस बार धान का बिचड़ा डालने के बाद किसान बारिश होने का इंतजार कर रहे थे. खेतों में उड़ते धूल देखकर किसान काफी हताश निराश होकर किसी तरह रोपनी का काम कर लिया है. भूमिगत जलस्तर के लगातार दोहन होने से पेयजल का संकट भी गहरा गया है.
बक्सर. जिले के राजपुर प्रखंड के सभी पंचायतों में धान रोपनी के लिए कृषि विभाग ने इस बार 20942 हेक्टेयर भूमि पर धान रोपने का लक्ष्य रखा था. जिसमें से 18 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपनी पूरा कर लिया गया है. डीजल पंप सेट, इलेक्ट्रिक मोटर, नहर के पानी से किसानों ने किसी तरह सिंचाई कर धान की रोपनी करना शुरू कर दिया है. धान रोपनी समय बीत जाने के बाद हो रहा है. ऐसे में इस बार फसल की पैदावार बहुत ही कम होगा.
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बार धान का बिचड़ा डालने के बाद किसान बारिश होने का इंतजार कर रहे थे. खेतों में उड़ते धूल देखकर किसान काफी हताश निराश होकर किसी तरह रोपनी का काम कर लिया है. भूमिगत जलस्तर के लगातार दोहन होने से पेयजल का संकट भी गहरा गया है.फिर भी किसान अपनी रोजी रोटी के लिए दिन रात मेहनत कर धान की रोपनी कर दिए हैं. अधिकतर किसान बटाई पर खेती किये हैं. इन किसानों के पसीने छूट रहे हैं.
पिछले वर्ष सही मॉनसून को देखकर इस बार 14 हजार से 16 हजार प्रति बीघा कि दर से किसानों ने बटाई पर खेती लिया है. जिसमें फसल उगाना काफी मुश्किल साबित हो रहा है. धान रोपनी होने के बाद भी बरसात के मौसम में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है. ऐसे में खेतों में लगा पानी भी समाप्त हो रहा है. लगातार धान के खेत में पानी नहीं होने से पौधे भी पीले पड़ रहे हैं .पौधों को बचाने के लिए किसान दिन रात रखवाली कर नहर में उपलब्ध पानी से जीवन रक्षक पानी देकर पौधे की सिंचाई कर रहे हैं. इस बार समय बीत जाने के बाद भी किसानों को उम्मीद है कि कुछ फसल हो जायेगा.
जलवायु में हो रहे परिवर्तन से किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गयी हैं. जिसके लिए वैकल्पिक तौर पर कृषि विभाग के तरफ से किसानों को कम समय में तैयार होने वाले फसलों को उगाने का सलाह दिया जा रहा है. जिसको लेकर कृषि विभाग के कर्मी किसानों से बातचीत भी कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि सरकार किसानों को सहायता राशि देने के लिए सूखाग्रस्त घोषित करें लेकिन अभी तक विभाग के तरफ से सूखाग्रस्त घोषित करने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है. तापमान अधिक होने से धान के पौधों में तना छेदक रोग लग रहा है. जिससे बचाव के लिए कृषि विभाग के कर्मी गांव-गांव पहुंचकर किसानों को इस रोग से बचाव के लिए सुझाव दे रहे हैं
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