Bullet Train Bihar: पटना से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, 6 महीने में DPR, पटना से सिलीगुड़ी का सफर अब 3 घंटे में

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Bullet Train Bihar: बिहार में हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी का सपना अब कागज से जमीन पर उतरता दिख रहा है. पटना के रास्ते वाराणसी से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर अगले छह महीने में तैयार कर ली जाएगी.
Bullet Train Bihar: बिहार की रफ्तार को नए पंख लगने वाले हैं. वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत पटना जिले में लगभग 65 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा.
अधिकारियों के अनुसार, ट्रैक निर्माण के लिए 60 से अधिक गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां जरूरत के अनुसार जमीन अधिग्रहण किया जाएगा.
फुलवारीशरीफ के पास बनेगा स्टेशन
पटना में बुलेट ट्रेन का प्रमुख स्टेशन फुलवारीशरीफ एम्स के पास प्रस्तावित है. इसके साथ ही एम्स, फुलवारीशरीफ और पाटलिपुत्र स्टेशन के आसपास एलिवेटेड ट्रैक बनाने पर भी गंभीर मंथन चल रहा है. योजना यह है कि शहर के भीतर जमीन की कम और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अधिकतर हिस्सा एलिवेटेड रखा जाए, ताकि शहरी ढांचे पर कमी असर पड़े.
पेड़ों को काटने के बजाय ट्रांसप्लांट करने की तैयारी
विकास की इस दौड़ में प्रकृति का भी ध्यान रखा जा रहा है. एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण में पटना जिले के लगभग 3,885 पेड़ बाधा बन सकते हैं, जिन्हें काटने के बजाय ‘ट्रांसप्लांट’ करने की तैयारी है. इसके लिए वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी.
पूरे प्रोजेक्ट के लिए पटना में लगभग 138 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी. केवल पटना ही नहीं, बल्कि बक्सर, भोजपुर, मोकामा, क्यूल, जमालपुर और सुल्तानगंज जैसे इलाकों में भी ट्रैक के लिए गांवों का चिह्नीकरण किया जा रहा है.
बिहार में कहां-कहां ठहरेंगे बुलेट के कदम
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन की घोषणा कर चुके हैं. बिहार में इस ट्रेन का स्टॉपेज पटना और कटिहार में प्रस्तावित है. 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली यह बुलेट ट्रेन वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी की दूरी महज 2 घंटे 55 मिनट में तय करेगी. इससे बिहार के आर्थिक, औद्योगिक और पर्यटन विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है.
दानापुर मंडल में हुई प्रेस वार्ता के अनुसार, यह कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को घटाएगा बल्कि उत्तर बिहार और सीमांचल के इलाकों को सीधे तौर पर तेज कनेक्टिविटी से जोड़ देगा. इस प्रोजेक्ट से बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर में एक ऐतिहासिक क्रांति आने की उम्मीद है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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