फल्गु नदी के लाल बालू का खत्म हुआ काला खेल, नेपाल तक था डिमांड, आज उगे हैं घास-फूस

Updated at : 01 Dec 2023 7:54 PM (IST)
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फल्गु नदी के लाल बालू का खत्म हुआ काला खेल, नेपाल तक था डिमांड, आज उगे हैं घास-फूस

फल्गु नदी का लाल बालू कभी सोना के समान था और फल्गु नदी के बालू की मांग प्रदेश ही नहीं विदेशों में नेपाल तक भी थी.आज फल्गु नदी वीरान हो गया है. लाल बालू का काला खेल भी खत्म हो गया है. नदी में बालू की जगह जंगलनुमा बड़े-बड़े घास-फूस उगे हैं. बालू कहीं भी दिखायी नहीं दे रहा है.

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पंकज कुमार, जहानाबाद. जिले के फल्गु नदी का लाल बालू कभी सोना के समान था और फल्गु नदी के बालू की मांग प्रदेश ही नहीं विदेशों में नेपाल तक भी थी.आज फल्गु नदी वीरान हो गया है. लाल बालू का काला खेल भी खत्म हो गया है. नदी में बालू की जगह जंगलनुमा बड़े-बड़े घास-फूस उगे हैं. बालू कहीं भी दिखायी नहीं दे रहा है. यही वजह है कि खनन विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद फल्गु नदी से बालू की बंदोबस्ती करने के लिए छह बार टेंडर निकला लेकिन एक बार भी कोई भी संवेदक टेंडर में भाग लेने के लिए निविदा नहीं डाला. परिणामस्वरूप अभी तक फल्गु नदी में बालू घाट की बंदोबस्ती नहीं हो सकी है.

करोड़ों में हुआ करता था फल्गु नदी के बालू की बंदोबस्ती

विदित हो कि आज से चार साल पहले तक फल्गु नदी के बालू की बंदोबस्ती करोड़ों में हुआ करता था, दिन भर फल्गु नदी में गहमागहमी का माहौल रहता था. यहां तक कि रात में भी बालू घाट गुलजार हुआ करता था. हजारों मजदूरों का घर परिवार नदी की कमाई से चलता था. सैकड़ों ट्रक नदी तट पर लगे रहते थे, जेसीबी मशीनों की घरघराहट भी देर रात तक सुनाई पड़ती थी. जब से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा फल्गु नदी से बालू के उठाव पर रोक लगायी गयी, उसके बाद से नदी वीरान हो गयी.

बिहार के बाहर भी फल्गु नदी के बालू का रहता था डिमांड

जिले के फल्गु नदी के बालू का डिमांड बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ नेपाल में भी रहती थी. यहां से बालू पटना, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, समस्तीपुर, कटिहार, दरभंगा, गोरखपुर, देवरिया के साथ-साथ नेपाल भी जाती थी, उस समय रोजाना सैकड़ों की संख्या में ट्रक फल्गु नदी में प्रवेश करती थी.

नदी तट रहता था गुलजार

आज से 4 साल पहले तक फल्गु नदी के तट गुलजार रहता था. जिन जगहों पर बालू घाट बनाया गया था, उसके आसपास स्थानीय लोगों द्वारा होटल एवं गुमटी खोल रोजगार चलता था. स्थानीय युवा भी ट्रैक्टर खरीद कर बालू के व्यवसाय में जुड़ जाते थे, जिससे प्रत्येक महीने हजारों की कमाई होती थी. जिसकी वजह से युवाओं का एक सिंडिकेट था . नदी तट के आसपास का माहौल काफी खुशनुमा रहता था.

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छह बार निकाला गया है बालू घाटों का टेंडर

खनन विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद फल्गु नदी के बालू के बंदोबस्ती करने के लिए 6 बार टेंडर निकाला गया है लेकिन फल्गु नदी में बालू नहीं रहने के कारण कोई भी संवेदक ने टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं लिया. ज्ञात हो कि खनन विभाग द्वारा फल्गु नदी में बालू घाट के बंदोबस्ती करने के लिए 16 ग्रुप बनाया है लेकिन फल्गु नदी में कहीं भी बालू नहीं दिखाई दे रही है जिसकी वजह से कोई भी संवेदक बालू घाट की बंदोबस्ती में भाग लेने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.

चोरी चुपके हो रहा है अवैध उत्खनन

फल्गु नदी में बालू घाट की बंदोबस्ती नहीं होने के कारण से अवैध उत्खनन का मामला कम नहीं हो रहा है. बालू माफियाओं द्वारा फल्गु नदी में आज भी चिन्हित जगहों पर बालू का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. हालांकि खनन विभाग द्वारा इसके खिलाफ लगातार अभियान भी चलाया जाता रहा है और कानूनी कार्यवायी भी की जाती है.

गठित की गयी है कमेटी

फल्गु नदी में बालू नहीं रहने के मामले को लेकर जिला पदाधिकारी रिची पांडेय के निर्देश पर एसडीओ की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है. कमेटी फल्गु नदी में बालू का अध्ययन करेगी. कमेटी द्वारा जिला अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी जायेगी. इसके बाद नए सिरे से फल्गु नदी में बालू घाट की बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

फल्गु नदी में बालू कम रहने की वजह से 6 बार टेंडर निकालने के बावजूद भी कोई भी संवेदक निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं लिया. अब नए सिरे से एसडीओ की अध्यक्षता में फल्गु नदी में बालू को लेकर अध्ययन किया जा रहा है. इसके बाद तय किया जायेगा कि कितने राशि में बालू की बंदोबस्ती की जायेगी. उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू किया जायेगा.

  • नवेंदु कुमार, जिला खनन पदाधिकारी, जहानाबाद

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