लोक और भक्ति गीतों से गूंजा युवा छात्रावास

युवा छात्रावास परिसर में आयोजित मकर मेला के पांचवें दिन भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रही.
राजगीर.युवा छात्रावास परिसर में आयोजित मकर मेला के पांचवें दिन भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रही. शाम तक चले इस रंगारंग आयोजन में लोक-संस्कृति, भक्ति और देशभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को निखारना रहा. कार्यक्रम की शुरुआत लोकगायिका शिखा कुमारी की सुमधुर भक्ति प्रस्तुतियों से हुई. उन्होंने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया. उनकी भावपूर्ण गायकी पर दर्शक झूम उठे. हर गीत के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाते रहे. भक्ति गीतों के माध्यम से उन्होंने श्रोताओं के मन को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया. इसके बाद मंच संभाला प्रसिद्ध लोक गायक कमलेश सिंह ने. उन्होंने अपनी सशक्त और जोशीले आवाज और प्रभावशाली प्रस्तुति से कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी. उन्होंने “सांसों की माला पे”, “छाप तिलक सब छीनी”, “पिया रे पिया रे”, “दमादम मस्त कलंदर” जैसे सूफी और लोक रंग से सजे गीत प्रस्तुत किया. इसके अलावा “बस याद रह जाती है”, “एक मुलाकात जरूरी है सनम” जैसे भावुक गीतों ने श्रोताओं की भावनाओं को छू लिया. देशभक्ति से ओतप्रोत गीत “संदेशे आते हैं” की प्रस्तुति पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा और दर्शकों में देशप्रेम का जज्बा साफ दिखाई दिया. कार्यक्रम में अनुष टूप की प्रस्तुति ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. उनकी गायकी और मंचीय प्रस्तुति को खूब सराहा गया. मकर मेला के इस सांस्कृतिक संध्या ने न सिर्फ स्थानीय कलाकारों को पहचान दिलाई, बल्कि राजगीर की समृद्ध लोक-संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर किया है. कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कलाकारों का सम्मान करते हुए दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया.
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