कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की पहल

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जिले में कृषि-आधारित उद्यमों को विकसित करने की दिशा में जिला उद्योग विभाग ने व्यापक सर्वे कराया है.

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कंचन कुमार, बिहारशरीफ.

जिले में कृषि-आधारित उद्यमों को विकसित करने की दिशा में जिला उद्योग विभाग ने व्यापक सर्वे कराया है. वर्ष 2025 में सर्वे के माध्यम से यह चिन्हित किया गया है कि जिले के किस प्रखंड में कौन-सी फसल या उत्पाद प्रमुखता से उत्पन्न हो रहा है, ताकि उसी आधार पर कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सके. किसानों और उद्योगों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के उद्देश्य से जिला उद्योग विभाग एवं कृषि विभाग ने बिहान ऐप का उपयोग शुरू किया है. इस ऐप के जरिए कृषि उत्पादों की उपलब्धता, आपूर्ति और संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है. इससे न केवल किसानों को उनके उत्पाद का उचित बाजार मिलेगा, बल्कि उद्योगों को भी कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो सकेगा. चावल व मक्का की प्रचुर उपलब्धता को देखते हुए जिले में एथेनॉल उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं. वहीं, कृषि आधारित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) जैसे राइस मिल, आटा मिल, अचार-जाम निर्माण इकाइयों को सर्वे के बाद वित्तीय सहायता भी दी जा रही है.

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प्रखंडवार उत्पादन की पहचान:-

सर्वे के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों में होने वाले प्रमुख उत्पादन को सूचीबद्ध किया गया है. बिहारशरीफ प्रखंड में बावन बुटी, हस्तकरघा, आलू, गुलाब और गेंदा फूल की खेती चिन्हित की गई है. रहुई प्रखंड में चमड़े के जूते का निर्माण और फूलगोभी की खेती प्रमुख है. अस्थावां में धान उत्पादन, सरमेरा में एप्पल बेरी और प्याज, बिंद में मशरूम उत्पादन किया जा रहा है. राजगीर प्रखंड में चुड़ा, सर्फ और साबुन निर्माण, सिलाव में मक्का, खाजा, हस्तकरघा, बुनकर, स्वीट कॉर्न और कॉर्न का उत्पादन होता है। कतरीसराय में मूंग, मूंगफली, तरबूज और खरबूजा, गिरियक में खीरा, इस्लामपुर में पान, लाई, मुकंद दाना और शिमला मिर्च की खेती की जा रही है. एकंगरसराय में झूला निर्माण, हिलसा और करायपरसुराय में सब्जी उत्पादन, परबलपुर में खोवा, पेड़ा, आलू और प्याज की खेती, थरथरी में बेबी कॉर्न, नूरसराय में कृषि यंत्र निर्माण, बेन में धान और मशरूम उत्पादन चिन्हित किया गया है. वहीं, हरनौत में जाता सत्तू, बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न, चंडी में धान, आलू और प्याज तथा नगरनौसा में स्ट्रॉबेरी, बैंगन और ड्रैगन फ्रूट की खेती की पहचान की गई है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

जिला उद्योग विभाग के इस प्रयास का उद्देश्य जिले और राज्य को एक प्रमुख कृषि-प्रसंस्करण हब के रूप में विकसित करना है. इससे किसानों की आय बढ़ेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

-सचिन कुमार, प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग विभाग, नालंदा

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