ट्रेन के नीचे से गुजरने के दौरान महिला घायल

रविवार की शाम हिलसा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के नीचे से गुजरने के दौरान एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई.
हिलसा. रविवार की शाम हिलसा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के नीचे से गुजरने के दौरान एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई. घटना के बाद स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई. मौके पर मौजूद लोगों की मदद से घायल महिला को इलाज के लिए हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. घायल महिला की पहचान चिकसौरा थाना क्षेत्र के मोहददीपुर गांव निवासी 60 वर्षीय मालती देवी के रूप में की गई है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के नीचे से गुजरने का प्रयास कर रही थी. इसी दौरान अचानक ट्रेन चल पड़ी, जिससे वह उसकी चपेट में आ गई. हादसे में महिला को गंभीर चोटें आई हैं. हिलसा रेलवे स्टेशन पर पैदल पुल (ओवरब्रिज) नहीं होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्टेशन के पश्चिमी इलाके देवनगर, गांधीनगर, सरस्वती कॉलोनी, खोरमपुर, कैतिया बिगहा, अनुमंडलीय अस्पताल, हिलसा जेल, अनुमंडल कार्यालय, हिलसा कोर्ट, निबंधन कार्यालय एवं हिलसा बाजार की ओर जाने वाले लोगों को मजबूरी में ट्रेन के नीचे से गुजरकर आवागमन करना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन स्टेशन पर घंटों तक मालगाड़ी खड़ी रहती है, जिससे स्कूली बच्चों सहित आम यात्रियों को ट्रेन के नीचे से निकलना पड़ता है. इस दौरान कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है. यात्री सुविधाएं नदारद, सिर्फ आश्वासन दैनिक यात्री रेल संघ के सदस्यों एवं स्थानीय निवासियों ने कई बार रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से स्टेशन पर पैदल पुल निर्माण की मांग की है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव मात्र दो मिनट का होने के कारण कई बार टिकट लेने के दौरान ही ट्रेन छूट जाती है, जिससे यात्रियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. हिलसा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म काफी नीचे हैं, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों, बीमारों, दिव्यांगों एवं गर्भवती महिलाओं को ट्रेन पर चढ़ने-उतरने में भारी कठिनाई होती है। लगभग प्रतिदिन पैर फिसलने से यात्री चोटिल होते हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में फतुहा-हिलसा-इस्लामपुर रेलखंड की शुरुआत हुई थी, लेकिन दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यात्री सुविधाएं आज भी नदारद हैं. ओवरब्रिज के अभाव में आए दिन लोग जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करते हैं और इस दौरान दुर्घटनाएं होती रहती हैं.
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