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भारतीय संविधान देश की एकता और समरसता का प्रतीक

Updated at : 21 Nov 2025 8:49 PM (IST)
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भारतीय संविधान देश की एकता और समरसता का प्रतीक

नालंदा खुला विश्वविद्यालय में ‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’ वार्षिक कार्यक्रम के तहत आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया.

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सिलाव. नालंदा खुला विश्वविद्यालय में ‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’ वार्षिक कार्यक्रम के तहत आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. संगीता कुमारी ने की. उन्होंने बताया कि संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 26 नवंबर 2024 से 21 नवंबर 2025 तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए. कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर रविंद्र कुमार ने की. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान देश की एकता और समरसता का प्रतीक है. यह विश्व का सबसे बड़ा और समृद्ध संविधान है, जो नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन हेतु सभी आवश्यक अधिकार प्रदान करता है. संविधान के अनुच्छेदों में समभाव, सद्भाव, पारस्परिक सेवा और मानव मूल्यों का समावेश है, जिससे सामाजिक सौहार्द बढ़ता है. कुलसचिव प्रोफेसर अभय कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्नातक अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए कौशल आधारित कार्यक्रम शुरू करेगा, जिससे वे पढ़ाई के बाद रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें. वित्त पदाधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएं और पुरुष यदि किसी क्षेत्र में कौशल प्राप्त कर लें तो आत्मनिर्भर आसानी से बन सकते हैं. डॉ. किरण पांडेय ने कहा कि संविधान को केवल पढ़ना नहीं, जीवन में अपनाना जरूरी है. अधिकारों के साथ कर्तव्य भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. आईटी कोऑर्डिनेटर डॉ. अमरनाथ पांडेय ने विकसित भारत के पांचों स्तंभों की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए आत्मनिर्भर भारत के मंत्र का उद्देश्य हर वर्ग को सशक्त बनाना है. कोविड काल में भारत द्वारा बनाए गए टीके ने देश को चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. डॉ. मीना कुमारी ने कहा कि युवाओं को कौशलयुक्त बनाकर ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है. डॉ. पल्लवी ने कहा कि भारत प्राचीन समय में विश्व गुरु और ‘सोने की चिड़िया’ के नाम से जाना जाता था, और संविधान के मार्गदर्शन में देश पुनः उस गौरव को प्राप्त कर सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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