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32 वर्षों से अनुमंडलीय अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक के भरोसे

Updated at : 02 Jun 2025 9:35 PM (IST)
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32 वर्षों से अनुमंडलीय अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक के भरोसे

32 साल पहले पर्यटक शहर राजगीर के रेफरल अस्पताल को अनुमंडलीय अस्पताल का दर्जा दिया गया है.

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राजगीर. 32 साल पहले पर्यटक शहर राजगीर के रेफरल अस्पताल को अनुमंडलीय अस्पताल का दर्जा दिया गया है. तब से अबतक यह अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक (डीएस) के भरोसे चल रहा है. विभागीय उदासीनता के कारण तीन दशक बाद भी इस अस्पताल को नियमित उपाधीक्षक नहीं दिया गया है. यानि स्थापना के समय से ही यह अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक के भरोसे है. पूर्णकालिक उपाधीक्षक नहीं होने का असर अस्पताल की व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, और कर्मचारियों के समन्वय पर पड़ता है. कई बार नीतिगत निर्णयों में विलंब होता है. इससे मरीजों को समय पर इलाज और सुविधाएं नहीं मिल पाती है. मेडिकल स्टाफ की समस्याएं और संसाधनों की मांग भी प्रभावी रूप से उच्च स्तर तक नहीं पहुंच पाती हैं. राजगीर राज्य का प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है. यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं. इसलिये भी यहां का अस्पताल सुव्यवस्थित और सशक्त होना बहुत आवश्यक है. यहां नियमित उपाधीक्षक की नियुक्ति होने से अस्पताल का प्रबंधन चुस्त दुरुस्त और मजबूत होगा. आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेगी. राजगीर वासियों और यहां आने वाले पर्यटकों को सुलभ, समुचित और समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगा. जानकार बताते हैं कि प्रभारी उपाधीक्षक के पास सीमित अधिकार होते हैं. निकासी और व्ययन (डीडीओ) का दायित्व भी उनके पास नहीं होता है. इससे कई बार आवश्यक प्रशासनिक निर्णय समय पर नहीं लिया जाता है. अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति, संसाधनों का समुचित प्रबंधन, चिकित्सक व मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति, व्यवहार, साफ-सफाई, आपातकालीन सेवाएं और मरीजों की देखभाल जैसे निर्णय लेने में अड़चनें आती हैं. इसके कारण मरीजों को अक्सर असुविधा का सामना करना पड़ता है. पर्यटन स्थल के अलावे राजगीर में बड़ी संख्या में केन्द्रीय और राज्य स्तरीय संस्थान हैं. ऐसे में यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर और मजबूत होना आवश्यक है. लेकिन पूर्णकालिक उपाधीक्षक के अभाव में अस्पताल प्रबंधन अव्यवस्थित है. इसका खामियाजा मरीजों और पर्यटकों दोनों को उठाना पड़ता है. शहर के बुद्धिजीवियों का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए. राजगीर के अनुमंडलीय अस्पताल में नियमित उपाधीक्षक की शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए. इससे न केवल अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज भी संभव हो सकेगा. प्रखण्ड उप प्रमुख सुधीर कुमार पटेल, वार्ड पार्षद अनिल कुमार, महेन्द्र यादव, अनीता गहलौत एवं अन्य ने स्वास्थ्य एसीएस से पूर्णकालिक उपाधीक्षक पदस्थापित करने का मांग किया है.

— अनुमंडलीय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी

राजगीर के अनुमंडलीय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है. यह इस अस्पताल की गंभीर समस्या बन गयी है. इस अस्पताल में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति न होने के कारण मरीजों को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता है. खासकर इमरजेंसी मामलों और गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. हृदय, श्वसन, न्यूरोलॉजी, नेत्र रोड, हड्डी रोग, प्रसूति एवं स्त्री रोग जैसे विभागों में विशेषज्ञों के अभाव के कारण अक्सर मरीजों को प्राथमिक इलाज देकर पटना या पावापुरी विम्स रेफर कर दिया जाता है. इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि गरीब और दूरदराज से आने वाले लोगों के लिए यह आर्थिक और मानसिक बोझ भी बन जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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