नालंदा के 50 मुखिया का ओडिशा दौरा, सीखेंगे पंचायतों के विकास का नया तरीका; 18-21 अगस्त तक चलेगा चार दिवसीय भ्रमण

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नालंदा के 50 मुखिया 18 से 21 अगस्त तक ओडिशा की आदर्श ग्राम पंचायतों का अध्ययन करेंगे. वे स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं और सतत विकास की बारीकियां सीखेंगे.

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Biharsharif News : नालंदा. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत नालंदा जिले के 50 चयनित मुखिया अब ओडिशा की आदर्श ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली को करीब से समझेंगे. पंचायती राज विभाग की ओर से आयोजित चार दिवसीय राज्य-बाह्य अध्ययन भ्रमण में पंचायत प्रतिनिधि ओडिशा के मयूरभंज और गंजाम जिलों की उत्कृष्ट पंचायतों का दौरा करेंगे. इस दौरान वे पंचायतों में विकास, प्रशासन, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे.

बिहार पंचायती राज विभाग के अधीन संचालित बिहार राज्य पंचायत संसाधन संस्था की ओर से इस संबंध में कार्यक्रम जारी किया गया है. परियोजना निदेशक नवीन कुमार सिंह के पत्र संख्या 2457 के अनुसार, नालंदा के चयनित 50 मुखिया 18 से 21 अगस्त 2026 तक ओडिशा की विभिन्न आदर्श पंचायतों का अध्ययन भ्रमण करेंगे.

18 अगस्त को पटना से रवाना होगा दल

अध्ययन भ्रमण में शामिल सभी पंचायत प्रतिनिधियों को 18 अगस्त की सुबह नौ बजे पटना के किदवईपुरी स्थित ठाकुर प्रसाद सामुदायिक भवन में पहुंचना होगा. यहीं से अध्ययन दल की यात्रा शुरू होगी. कार्यक्रम का आयोजन जनहित सांस्कृतिक कला केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है.

चार दिनों के इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य नालंदा के पंचायत प्रतिनिधियों को ओडिशा में अपनायी जा रही बेहतर पंचायत प्रशासन और विकास की कार्यप्रणाली से परिचित कराना है. प्रतिनिधि वहां की पंचायतों में जाकर यह समझेंगे कि स्थानीय स्तर पर योजनाओं को किस तरह लागू किया जा रहा है.

पंचायतों की जमीनी व्यवस्था को समझेंगे मुखिया

अध्ययन भ्रमण के दौरान मुखिया केवल आदर्श पंचायतों की उपलब्धियां देखने तक सीमित नहीं रहेंगे. वे वहां की जमीनी व्यवस्था, पंचायत प्रबंधन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को भी समझेंगे.

पंचायतों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, स्वच्छता व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव, स्थानीय प्रशासनिक प्रबंधन और जनभागीदारी से जुड़े कार्यों की जानकारी ली जाएगी. इसके अलावा डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन शासन व्यवस्था के इस्तेमाल को भी समझने का अवसर पंचायत प्रतिनिधियों को मिलेगा.

डिजिटल सेवाओं और सतत विकास पर रहेगा जोर

ओडिशा की आदर्श पंचायतों में सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत विकास लक्ष्यों को लेकर किये जा रहे कार्यों का भी अध्ययन किया जाएगा. प्रतिनिधि यह जानने की कोशिश करेंगे कि पंचायत स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है.

अध्ययन भ्रमण के दौरान मिले अनुभवों को नालंदा की पंचायतों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने पर जोर रहेगा. इससे पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए नये तरीके अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

पहले अध्ययन भ्रमण कर चुके मुखिया दोबारा नहीं होंगे शामिल

पंचायती राज विभाग ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किये हैं. वित्तीय वर्ष 2026-27 में जो पंचायत प्रतिनिधि पहले ही राज्य के अंदर या राज्य के बाहर किसी अध्ययन भ्रमण में शामिल हो चुके हैं, उन्हें इस कार्यक्रम में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा.

यदि चयनित कोई मुखिया किसी कारण से अध्ययन भ्रमण में शामिल नहीं हो पाता है, तो जिला पंचायत राज पदाधिकारी की अनुमति से उसके स्थान पर दूसरे पंचायत प्रतिनिधि का चयन किया जा सकेगा.

भोजन और ठहरने की भी होगी व्यवस्था

अध्ययन भ्रमण के दौरान चयनित संस्था को सभी 50 पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भोजन, ठहरने, आवागमन और चाय-नाश्ते समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.

प्रतिनिधियों की सुविधा के साथ उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखने को कहा गया है. चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधियों को तय कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग आदर्श पंचायतों का भ्रमण कराया जाएगा.

डिजिटल माध्यम से होगी कार्यक्रम की निगरानी

पूरे अध्ययन भ्रमण की गतिविधियों को डिजिटल माध्यम से दर्ज करने की भी व्यवस्था की गयी है. राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान की वरिष्ठ सलाहकार ममता कुमारी को भ्रमण से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गयी है.

उन्हें प्रतिभागियों की उपस्थिति, तस्वीरों, चलचित्र और कार्यक्रम से जुड़े अन्य विवरण प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल पर नियमित रूप से दर्ज करने का निर्देश दिया गया है. इससे अध्ययन भ्रमण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार रहेगा और कार्यक्रम की निगरानी भी की जा सकेगी.

17 प्रखंडों के 50 मुखिया होंगे शामिल

इस चार दिवसीय अध्ययन भ्रमण में नालंदा जिले के 17 प्रखंडों के 50 महिला और पुरुष मुखिया शामिल होंगे. इनमें बेन, बिहारशरीफ, चंडी, इस्लामपुर, करायपरसुराय, कतरीसराय, नगरनौसा, नूरसराय, परवलपुर, रहुई, राजगीर, सिलाव, थरथरी, हरनौत, अस्थावां, बिंद और हिलसा प्रखंड के पंचायत प्रतिनिधि शामिल हैं.

नालंदा में लागू हो सकते हैं सफल प्रयोग

पंचायती राज विभाग की इस पहल का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को केवल प्रशिक्षण और बैठकों तक सीमित रखने के बजाय दूसरे राज्यों की सफल व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराना है. ओडिशा की आदर्श पंचायतों में किये जा रहे प्रयोगों को करीब से देखने के बाद नालंदा के मुखिया अपने-अपने क्षेत्रों की जरूरत के हिसाब से उन व्यवस्थाओं को अपनाने का प्रयास कर सकते हैं.

खास तौर पर स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं, पंचायत प्रबंधन, ऑनलाइन शासन, आधारभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के क्षेत्र में यह अध्ययन भ्रमण उपयोगी साबित हो सकता है. अब देखना होगा कि ओडिशा की पंचायतों से मिले अनुभवों को नालंदा के मुखिया अपने पंचायत क्षेत्रों में किस तरह लागू करते हैं और इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को कितनी नई दिशा मिलती है.


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कंचन कुमार

लेखक के बारे में

By कंचन कुमार

कंचन कुमार वर्ष 2009 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उत्तराखंड से शुरुआत करने के बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पटना, नवादा और बिहारशरीफ में विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया. पिछले 12 वर्षों से प्रभात खबर बिहारशरीफ कार्यालय में नालंदा जिला रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं. जिला प्रशासन, खोजी एवं विशेष रिपोर्ट, जमीनी पड़ताल, विकास, जनसरोकार के मुद्दों तथा लोकसभा और विधानसभा चुनावों के गहन विश्लेषण के लिए उनकी विशेष पहचान है.

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