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निजी क्लिनिक व अस्पतालों में लटके हैं ताले

Updated at : 03 Apr 2020 5:23 AM (IST)
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निजी क्लिनिक व अस्पतालों में लटके हैं ताले

निजी क्लिनिक व अस्पतालों में लटके हैं ताले लॉकडाउन के नौवें दिन. पुलिस दिखी काफी सख्त, खंदकपर की जा रही वाहन जांचआमलोगों में दिख रहा लॉकडाउन व कोरोना का भयफोटो:02बीआइएच : 06 का कैप्सन : आंबेडकर चौक देवीसराय के समीप सुनसान सड़क.फोटो:02बीआइएच : 07 का कैप्सन : खंदक मोड़ पर वाहन चेकिंग करती पुलिस.संवाददाता4बिहारशरीफकोरोना वायरस […]

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निजी क्लिनिक व अस्पतालों में लटके हैं ताले लॉकडाउन के नौवें दिन. पुलिस दिखी काफी सख्त, खंदकपर की जा रही वाहन जांचआमलोगों में दिख रहा लॉकडाउन व कोरोना का भयफोटो:02बीआइएच : 06 का कैप्सन : आंबेडकर चौक देवीसराय के समीप सुनसान सड़क.फोटो:02बीआइएच : 07 का कैप्सन : खंदक मोड़ पर वाहन चेकिंग करती पुलिस.संवाददाता4बिहारशरीफकोरोना वायरस जैसी संक्रामक बीमारी का भय और लॉकडाउन का डर आम लोगों में पूरी तरह छाया हुआ है. लोग घरों में आराम से रहते हैं. परिवार और बच्चों के संग इतनी लंबी छुट्टी में रहना कर्मचारियों को बहुत ही अच्छा लगता है. कुछ बदमाश और बिना काम के लोग ही सड़कों पर नजर आते हैं. लॉक डाउन के नौवें दिन सड़कों पर सन्नाटा ही सन्नाटा दिखता है. एक तो मौसम की बेरुखी है कि भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं. वहीं लॉकडाउन का असर है कि लोग घरों में ही परिवार के बीच रहना पसंद करते हैं. लॉकडाउन का असर है कि सुबह दो से तीन घंटे ही किराना और सब्जी की दुकानें खुलती हैं. जरूरत के मुताबिक लोग घर से बाहर निकलकर आवश्यक सामग्री की खरीद करते हैं. वैसे लोग जिनका लॉकडाउन के असर से व्यवसाय बंद हो गया है. खासकर भूंजा बेचने वाले सहित ठेला पर अन्य तरह के व्यवसाय करने वाले अब शहर की गलियों में घूम-घूमकर सब्जी बेचते नजर आते हैं, जिससे वे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. वहीं लॉकडाउन से कई गरीब घरों में खाना नहीं बन रहा है. बच्चे भूखे रहते हैं. वैसे लोगों के घरों में बिहार थानाध्यक्ष प्रतिदिन करीब ढाई सौ लोगों को खाना का पैकेट पहुंचाकर राहत देने में जुटे हुए हैं. इनके अलावा कई स्वयंसेवी संगठन और क्लब के लोग भी गरीब, भूखे एवं जरूरत मंदों के घरों में जाकर खाना का पैकेट उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं. खाना पैकेट पहुंचाने में भी लोग सोशल डिस्टेंस का पालन करना नहीं भूलते हैं.मौसमी बीमारी से पीड़ित लोग परेशानलॉकडाउन से शहर के निजी क्लिनिक एवं अस्पतालों में ताले लटके हुए हैं. छोटी-छोटी एवं मौसमी बीमारी से पीड़ित लोग काफी परेशान होते हैं. दवा दुकानों से पूछताछ कर दवा खरीदकर उपयोग करते दिख रहे हैं. लॉकडाउन की समाप्ति का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. वहीं, लॉकडाउन में बेवजह सड़क पर घूमने वालों के साथ सख्ती बरत रही है. किसी चौराहे पर पुलिस बेवजह घूमने वालों को उठक-बैठक कराकर घर वापस करा रही है. वहीं, अस्पताल चौराहे पर दिन-रात तैनात रहने वाली यातायात पुलिस बिना हेलमेट के बाइकचालकों से जुर्माना भी वसूल कर रही है. फिर भी कुछ लोग बेवजह सड़कों पर घूमने से बाज नहीं आ रहे हैं.

वैसे लोग जिनका लॉकडाउन के असर से व्यवसाय बंद हो गया है. खासकर भूंजा बेचने वाले सहित ठेला पर अन्य तरह के व्यवसाय करने वाले अब शहर की गलियों में घूम-घूमकर सब्जी बेचते नजर आते हैं, जिससे वे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. वहीं लॉकडाउन से कई गरीब घरों में खाना नहीं बन रहा है. बच्चे भूखे रहते हैं. वैसे लोगों के घरों में बिहार थानाध्यक्ष प्रतिदिन करीब ढाई सौ लोगों को खाना का पैकेट पहुंचाकर राहत देने में जुटे हुए हैं. इनके अलावा कई स्वयंसेवी संगठन और क्लब के लोग भी गरीब, भूखे एवं जरूरत मंदों के घरों में जाकर खाना का पैकेट उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं.

खाना पैकेट पहुंचाने में भी लोग सोशल डिस्टेंस का पालन करना नहीं भूलते हैं.मौसमी बीमारी से पीड़ित लोग परेशानलॉकडाउन से शहर के निजी क्लिनिक एवं अस्पतालों में ताले लटके हुए हैं. छोटी-छोटी एवं मौसमी बीमारी से पीड़ित लोग काफी परेशान होते हैं. दवा दुकानों से पूछताछ कर दवा खरीदकर उपयोग करते दिख रहे हैं. लॉकडाउन की समाप्ति का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. वहीं, लॉकडाउन में बेवजह सड़क पर घूमने वालों के साथ सख्ती बरत रही है. किसी चौराहे पर पुलिस बेवजह घूमने वालों को उठक-बैठक कराकर घर वापस करा रही है. वहीं, अस्पताल चौराहे पर दिन-रात तैनात रहने वाली यातायात पुलिस बिना हेलमेट के बाइकचालकों से जुर्माना भी वसूल कर रही है. फिर भी कुछ लोग बेवजह सड़कों पर घूमने से बाज नहीं आ रहे हैं.

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