नालंदा जिले में निगरानी विभाग ने 11 ट्रैप, 14 अधिकारियों और कर्मियों को रिश्वत लेते पकड़ा

Published by :Vivek Singh
Published at :10 May 2026 2:12 PM (IST)
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Bihar News Nitish Kumar Nalanda district Vigilance Department conducted 11 traps in just two years catching 14 officers employees taking bribes

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में सबसे अधिक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. नालंदा जिले में वर्ष 2025 और 2026 के दौरान निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई में घूसखोरी के 11 ट्रैप, 14 अधिकारियों और कर्मियों को रिश्वत लेते पकड़ा है. नगरनौसा प्रखंड भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. सबसे बड़ी ट्रैप कार्रवाई 25 अप्रैल 2026 को हुई है. जब राजगीर थाने के दारोगा को 90 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया़ है. यह 2025-26 की सबसे बड़ी ट्रैप राशि मानी जा रही है. वहीं स्वास्थ्य विभाग में आशा बहाली, पीएससी के बीएसएम,बीपीआरओ,आंगनबाड़ी महिला पर्यवेक्षिका,शिक्षा विभाग, चंडी बीआरसी में संसाधन शिक्षक,बीईओ, बिहारशरीफ डीईओ कार्यालय के पूर्व लिपिक ,राजगीर अंचल के राजस्व कर्मचारी,इस्लामपुर के जेई नीतीश कुमार जैसे दर्जनों भ्रष्टाचारी नालंदा और बिहारशरीफ़ में बैठे हुए है.

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Bihar News: नालंदा जिले में वर्ष 2025 और 2026 के दौरान निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई में घूसखोरी के 11 बड़े मामले उजागर हुए हैं. इन कारवाई में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, बिजली और आंगनबाड़ी विभाग के कुल 14 अधिकारी एवं कर्मी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए है. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में सबसे अधिक छह बड़ी कार्रवाई हुई है.

जबकि नगरनौसा प्रखंड भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. सबसे बड़ी ट्रैप कार्रवाई 25 अप्रैल 2026 को हुई है. जब राजगीर थाने के दारोगा देवकांत कुमार को 90 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया़ यह 2025-26 की सबसे बड़ी ट्रैप राशि मानी जा रही है.

स्वास्थ्य विभाग में भी चरम पर भ्रष्टाचार

वहीं स्वास्थ्य विभाग में आशा बहाली के नाम पर लगातार घूसखोरी के मामले सामने आए है. नगरनौसा पीएससी के बीएसएम मनजीत कुमार को 10 हजार रुपये और इस्लामपुर में बीसीएम आशुतोष कुमार को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया.

आंगनबाड़ी महिला पर्यवेक्षिका ने की भारी भ्रष्टाचार

नगरनौसा में मार्च से मई 2026 के बीच तीन बड़ी कार्रवाई हुई है. यहां बीपीआरओ को 12 हजार रुपये घूस लेते पकड़ा गया, जबकि आंगनबाड़ी महिला पर्यवेक्षिका सुषमा कुमारी को 3,200 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था.

आरोप था कि पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर और अन्य सरकारी कार्यो के बदले कमीशन मांगा जा रहा था. शिक्षा विभाग भी निगरानी के रडार पर रहा है. चंडी बीआरसी में संसाधन शिक्षक मनोज कुमार वर्मा को 17 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया है. जबकि पूछताछ में बीईओ पुष्पा कुमारी का भी नाम सामने आया है.

डीपीओ और शिक्षक भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए

हिलसा में डीपीओ अनिल कुमार और शिक्षक संजय कुमार 20 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए. वहीं बिहारशरीफ डीईओ कार्यालय के पूर्व लिपिक राज किशोर सिन्हा को 1,600 रुपये घूस मामले में अदालत ने दो वर्ष की सजा सुनाई है.

राजस्व विभाग में भी कई भ्रष्टाचार के मामले

राजस्व विभाग में भी कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आए है. राजगीर अंचल के राजस्व कर्मचारी अखिलेश साह को जमीन परिमार्जन के नाम पर 45 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है. जबकि करायपरसुराय में हल्का कर्मचारी संजय कुमार 4,500 रुपये घूस लेते पकड़े गए.

बिजली विभाग में भी कई भ्रष्टाचार के मामले

बिजली विभाग में इस्लामपुर के जेई नीतीश कुमार और कर्मचारी देवेंद्र कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. आंकड़ों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में सबसे अधिक चार मामले सामने आए है. जबकि शिक्षा विभाग में तीन और राजस्व विभाग में दो कार्रवाई हुई है. लगातार हो रही ट्रैप कार्रवाई ने प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

केस- 01: महिला पर्यवेक्षिका 3200 रुपये घूस लेते गिरफ्तार

6 मई 2026 की नगरनौसा आंगनबाड़ी महिला पर्यवेक्षिका सुषमा कुमारी को 3,200 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया. आरोप था कि पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर और सरकारी कार्यों के बदले कमीशन मांगा जा रहा था.

केस-02: 90 हजार रुपये लेते राजगीर से दारोगा गिरफ्तार

25 अप्रैल 2026 को राजगीर थाने के एसआई देवकांत कुमार को 90 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया. यह पांच वर्षों की सबसे बड़ी ट्रैप राशि रही. कार्रवाई गिरियक रोड पर की गई

केस-03: नगरनौसा से आशा बहाली में बीसीएम गिरफ्तार

26 मार्च 2026 को नगरनौसा पीएचसी में तैनात बीसीएम मनजीत कुमार को 10 हजार रुपये घूस लेते पकड़ा गया. आशा कार्यकर्ता बहाली के लिए 25 हजार रुपये मांगे गए थे. ——–

केस-04: नगरनौसा बीपीआरओ पर निगरानी की कार्रवाई

20 मार्च 2026 को नगरनौसा के बीपीआरओ को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. लगातार कार्रवाई से नगरनौसा भ्रष्टाचार का हॉटस्पॉट बन गया. कुछ लोग नगरनौसा को भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ती जागरूकता के रूप में भी देख रहे हैं.

केस-05: चंडी बीआरसी में छापेमारी, बीईओ नामजद

16 मार्च 2026 को चंडी संसाधन शिक्षक मनोज कुमार वर्मा 17 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार हुए. पूछताछ में बीईओ पुष्पा कुमारी का नाम सामने आया.

केस-06: राजगीर में जमीन परिमार्जन में 45 हजार रुपये घूस


3 फरवरी 2026 को राजगीर अंचल के राजस्व कर्मचारी अखिलेश साह को जमीन परिमार्जन के नाम पर 45 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किया गया.

केस-07: इस्लामपुर जेई और मिस्त्री गिरफ्तार

नवंबर 2025 को इस्लामपुर बिजली विभाग के जेई नीतीश कुमार और कर्मचारी देवेंद्र कुमार 20 हजार रुपये घूस लेते पकड़े गए.

केस-08: करायपरसुराय के हल्का कर्मचारी 4500 रुपये लेते गिरफ्तार

नवंबर 2025 को करायपरसुराय के सांध पंचायत के हल्का कर्मचारी संजय कुमार को 4,500 रुपये घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया.

केस-09: इस्लामपुर बीसीएम पर दूसरी बड़ी कार्रवाई

अगस्त 2025 को इस्लामपुर स्वास्थ्य विभाग के बीसीएम आशुतोष कुमार को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. मामला आशा बहाली से जुड़ा था.

केस-10: डीईओ कार्यालय का क्लर्क दोषी

जुलाई 2025 को बिहारशरीफ डीईओ में पूर्व लिपिक राज किशोर सिन्हा 1,600 रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए. अदालत ने दो वर्ष की सजा सुनाई.

केस-11: हिलसा डीपीओ और शिक्षक गिरफ्तार

23 जून 2025 को हिलसा डीपीओ अनिल कुमार और शिक्षक संजय कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया. राशि गाड़ी की सीट के नीचे से बरामद हुई.

अंचल, थाना और कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा

बीते तीन-चार वर्षों में जिले में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ा है. अंचल, थाना और कई सरकारी विभागों में कमीशन व गिफ्ट के नाम पर रिश्वतखोरी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनती जा रही है.

कमीशन के विवाद में कई ठेकेदारों की फाइलें एक साल से कई अधिकारियों के पास लंबित पड़ी हैं. जिला निगरानी समिति को हर साल 78 से 98 शिकायतें मिलती हैं.

सरकारी कार्यालयों में निगरानी समिति का संपर्क नंबर तक प्रदर्शित नहीं है

लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने से भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लग पा रही. अधिकांश सरकारी कार्यालयों में निगरानी समिति का संपर्क नंबर तक प्रदर्शित नहीं है. जिससे आम लोगों के लिए शिकायत करना मुश्किल बना हुआ है.

बीते पांच महीनों में राज्य स्तरीय निगरानी टीम ने छह से अधिक भ्रष्ट अधिकारी-कर्मियों को गिरफ्तार किया गया. जबकि जिला स्तरीय निगरानी समिति लगभग निष्क्रिय रही.

लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण कई अधिकारी बेखौफ होकर रिश्वत मांग रहे

लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण कई अधिकारी बेखौफ होकर रिश्वत मांगते हैं. सबसे अधिक भ्रष्टाचार जमीन और राजस्व से जुड़े कार्यों में देखने को मिल रहा है.

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Vivek Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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