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जन्म प्रमाणपत्र बनाने में तिथि हेराफेरी का आरोप

Updated at : 21 Apr 2025 9:11 PM (IST)
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जन्म प्रमाणपत्र बनाने में तिथि हेराफेरी का आरोप

नगर परिषद, राजगीर में जन्म प्रमाण पत्र बनाने में फर्जीवाड़ा का एक मामला सामने आया है. इसका भंडाफोड़ प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सुभाष कुमार ने किया है.

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राजगीर. नगर परिषद, राजगीर में जन्म प्रमाण पत्र बनाने में फर्जीवाड़ा का एक मामला सामने आया है. इसका भंडाफोड़ प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सुभाष कुमार ने किया है. उन्होंने बताया कि नगर परिषद कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए एक आवेदन दिया गया है. वह आवेदन प्रखण्ड सांख्यिकीय पदाधिकारी सह सहायक निबंधक के पास बनाने के लिए प्रस्तुत किया गया. जांच के दौरान आवेदन में अंकित तिथि और आवेदन के साथ संलग्न सरकारी अस्पताल के टीकाकरण कार्ड का मिलान किया गया तो दोनों तिथि में बहुत अंतर पाया गया है. इससे साफ जाहिर होता है कि आवेदन द्वारा जन्मतिथि में जानबूझकर हेराफेरी की गई है. हैरानी की बात यह है कि इस फर्जी विवरण पर वार्ड पार्षद द्वारा अनुशंसा भी की गई है. इस खुलासे के बाद नगर परिषद और प्रखण्ड कार्यालय में हड़कंप मच गया है. सुभाष कुमार ने बताया कि राजगीर नगर परिषद में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए दिये गये एक आवेदन में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है. उन्होंने बताया कि आवेदक प्रकाश उपाध्याय द्वारा अपने पाल्य के जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए दिये गये आवेदन में बच्चे का जन्मतिथि 08.07. 2021 दर्शाया गया है. आवेदन के साथ संलग्न टीकाकरण कार्ड में उस बच्चे का जन्म 2017 अंकित है. यानि जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए दिये गये आवेदन की तिथि से चार साल पहले बच्चे का टीकाकरण किया गया है. सांख्यिकी पदाधिकारी सवालिया लहजे में कहते हैं कि जब बच्चा का जन्म 201 में हुआ है तब 2017 में टीकाकरण कैसे हुआ है. इससे साफ पता चलता है कि जन्म प्रमाण पत्र में उम्र के विरोधाभास है. इसमें छेड़छाड़ किया गया है. इसलिए उनके द्वारा इस आवेदन को खारिज कर दिया गया है. सांख्यिकीय पदाधिकारी ने बताया कि हैरानी की बात यह है कि इस फर्जी जन्मतिथि पर वार्ड पार्षद द्वारा भी अनुशंसा की गयी है. इससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है. ऐसे मामलों से न केवल सरकारी रिकॉर्ड में भ्रम उत्पन्न होता है, बल्कि सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाने की आशंका भी बढ़ जाती है. नगर परिषद को चाहिए कि वह इस मामले की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके. उन्होंने कहा बच्चे के जन्म के वर्षों बाद जन्म प्रमाण पत्र बनाने में इस प्रकार की गड़बड़ियों की गुंजाइश रहती है. इसलिए जन्म समय ही जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए शपथ पत्र की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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