बिहारशरीफ. जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत इस साल बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा. जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत जिले भर में कुल 5.52 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिससे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि करीब 3500 से 4000 लोगों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा. जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया है. पांच जून तक प्रखंड के नोडल पदाधिकारी पंचायत व वार्ड में पौधों के संग्रह स्थल का चयन करेंगे. पौधारोपण के साथ-साथ इन पौधों की सुरक्षा और देखभाल के लिए वनपोषण बहाल किये जायेंगे. इससे स्थानीय लोगों को लंबे समय तक रोजगार मिल सकेगा. पंचायत रोजगार सेवकों (पीआरएस) को प्रत्येक पंचायत में चार-चार यूनिट पौधे लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. साथ ही लगाए गए पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वनपोषकों की भर्ती की जाएगी. इस साल मनरेगा के तहत पौधारोपण का अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके मद्देनजर प्रशासनिक तैयारियां पहले से ही जोर-शोर से चल रही हैं, ताकि समय पर पौधारोपण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके. इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. जीविका दीदी और वन विभाग की नर्सरियों से पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित कर इस अभियान को और प्रभावी बनाया जाएगा.साथ ही दो सौ पौधा लगाने और उसकी देखरेख करने वाले किसानों या भूमि मालिकों को अगले पांच वर्षों तक के लिए विभाग 1960 रुपये मालिक सहयोग राशि भी दे रही है.विभाग का मानना हे कि फलदार पौध लगाने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी. इसलिए जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत आम, अमरूद्ध, जामुन, कटहल, शरीफा लगाये जा रहे हैं. किसानों द्वारा महोगनी, सागवान जैसे इमारती लकड़ी वाले पौधे भी लगाये जाते हैं. इस्लामपुर में सबसे अधिक और कतरीसराय में सबसे कम पौधे- जिले के विभिन्न प्रखंडों में पौधारोपण का लक्ष्य अलग-अलग रखा गया है. इस्लामपुर प्रखंड में सबसे अधिक 45 हजार 600 पौधे लगाए जाएंगे, जबकि कतरीसराय प्रखंड में सबसे कम संख्या में पौधारोपण होगा. अगले सप्ताह से जीविका दीदी की नर्सरी, वन विभाग और अन्य एजेंसियों को प्रजातिवार पौधे लगाने का ऑर्डर दिया जाएगा. इस बार निजी भूमि पर भी पौधारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा. किसानों को जागरूक कर उन्हें अपनी पसंद के पौधे लगाने की छूट दी जाएगी. इस पहल से न सिर्फ जिले का पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा. मनरेगा के तहत यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. मनरेगा के तहत पौधारोपण अभियान को गति देने के लिए जीविका दीदी की नर्सरी से सर्वप्रथम पौधों का उठाव किया जाएगा. यदि किसी क्षेत्र में जीविका दीदी की नर्सरी से पर्याप्त पौधे उपलब्ध नहीं होते हैं, तो वहाँ वन विभाग की नर्सरी से पौधे लिए जाएंगे। इसकी तैयारी के तहत जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) पहले से ही सूचीबद्ध करने का काम शुरू कर चुका है. प्रखंड-पंचायतों की संख्या-पौधारोपन का लक्ष्य अस्थावां-18-43200 पौधा बेन-09-21600 पाैधा बिहारशरीफ-18-43200 पौधा बिंद-07-16800 पौधा चंडी-14-31200 पौधा एकंगरसराय-16-38400 पौधा गिरियक-07-16800 पौधा हरनौत-15-38400 पौधा हिलसा-15-36000 पौधा इस्लामपुर-19-45600 पौधा करायपरसुराय-07-16800 पौधा कतरीसराय-05-12000 पौधा नगरनौसा-09-21600 पौधा नूरसराय-17-40800 पौधा परवलपुर-05-12000 पौधा रहुई-15-36000 पौधा राजगीर-08-19200 पौधा सरमेरा-08-19200 पौधा सिलाव-11-26400 पौधा थरथरी-07-16800 पौधा टोटल-230-552000 पौधा क्या कहते हैं अधिकारी- जिले के सभी पंचायत रोजगार सेवकों को प्रत्येक पंचायत में चार-चार यूनिट पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है. अधिक से अधिक पौधारोपन के लिए सार्वजनिक भूमि को चिन्हित कर जिओ टैगिंग का काम शुरू कर दिया जायेगा. निजी भूमि पर पौधा लगाने के लिए किसानों और भूमि मालिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. इसके लिए सभी पंचायत एवं प्रखंड लेवल के अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं. -प्रवीण कुमार, डीपीओ, मनरेगा, नालंदा
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