मुजफ्फरपुर-दरभंगा समेत 2 नई रेल लाइनों को मिली 511 करोड़ की सौगात, सफर होगा तेज और आसान

सांकेतिक तस्वीर
Bihar Rail : बिहार में लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी मुजफ्फरपुर-दरभंगा और मुजफ्फरपुर-कटरा-जनकपुर रोड रेल लाइन परियोजनाओं को अब नई जिंदगी मिलती दिख रही है. पूर्व मध्य रेलवे ने इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 511 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जिससे काम में तेजी आने की उम्मीद है.
Bihar Rail: लंबे समय से फाइलों में दबी मुजफ्फरपुर-दरभंगा और मुजफ्फरपुर-कटरा-जनकपुर रोड (सीतामढ़ी) नई रेल लाइन परियोजनाओं को अब नई रफ्तार मिलने वाली है. केंद्र सरकार द्वारा बजट आवंटन के बाद पूर्व मध्य रेलवे (ECR) ने इन दोनों महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के लिए ₹511 करोड़ की भारी-भरकम राशि जारी कर दी है.
इस निवेश से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सीतामढ़ी जिलों के बीच कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू होगा.
सालों पुरानी योजनाओं को मिला नया जीवन
मुजफ्फरपुर से दरभंगा के बीच वर्तमान में ट्रेनों को समस्तीपुर होकर लगभग 91 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. नई रेल लाइन बन जाने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 67 किलोमीटर रह जाएगी.
इस 67 किमी लंबे नए रेलखंड के लिए रेलवे ने ₹282.30 करोड़ आवंटित किए हैं. यह प्रोजेक्ट साल 2007-08 से ही लंबित था, लेकिन अब फंड मिलने से निर्माण कार्य में तेजी आएगी. इससे मिथिलांचल और तिरहुत क्षेत्र के बीच व्यापारिक और सामाजिक संबंध और भी मजबूत होंगे.
जनकपुर रोड प्रोजेक्ट को मिली संजीवनी
मुजफ्फरपुर-कटरा-जनकपुर रोड (सीतामढ़ी) नई रेल लाइन परियोजना के लिए भी ₹229.05 करोड़ का प्रावधान किया गया है. लगभग 66.55 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन मुजफ्फरपुर के ग्रामीण इलाकों जैसे कटरा और औराई को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ देगी.
इस रूट के शुरू होने से सीतामढ़ी और नेपाल सीमा के पास स्थित जनकपुर रोड तक पहुंचना बेहद सुगम हो जाएगा. यह प्रोजेक्ट 2008-09 में मंजूर हुआ था, लेकिन फंड की कमी के कारण अब तक ठंडे बस्ते में था. अब इन क्षेत्रों के लोगों का दशकों पुराना सपना सच होने की उम्मीद जगी है.
रोजगार और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सीतामढ़ी जिलों के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. रेलवे के इस विस्तार से स्थानीय स्तर पर छोटे व्यापारियों और किसानों को अपने उत्पाद दूसरे शहरों तक पहुंचाने में आसानी होगी. साथ ही, नए स्टेशनों के निर्माण से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.
इन दोनों रेल परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर बिहार के कई जिलों की तस्वीर बदल सकती है. बेहतर रेल कनेक्टिविटी से न सिर्फ सफर आसान होगा, बल्कि रोजगार, व्यापार और विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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