कांग्रेस आलाकमान के नोटिस पर,विधायक मनोज विश्वास का बयान-सम्मान नहीं मिला,इसलिए नहीं किया समर्थन

Updated at : 19 Mar 2026 1:26 PM (IST)
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Bihar Politics

Congress MLA Manoj Vishwas

Bihar Politics: कांग्रेस द्वारा जारी 'कारण बताओ' नोटिस का जवाब देने से पहले विधायक मनोज विश्वास ने जो खुलासे किए. उन्होंने बताया किस वजह से उन्होंने महागठबंधन के उम्मीदवार को वोट नहीं दिया.

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Bihar Politics: बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव के बाद हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है. कांग्रेस के विधायक मनोज विश्वास ने महागठबंधन के उम्मीदवार को वोट नहीं देने के फैसले पर खुलकर अपनी बात रखी है. पार्टी की ओर से नोटिस मिलने के बाद उन्होंने साफ कहा है कि यह कदम सम्मान की अनदेखी के कारण उठाया गया.

सम्मान नहीं तो वोट नहीं

महागठबंधन के प्रत्याशी को वोट न देने के बाद कांग्रेस के रडार पर आए विधायक मनोज विश्वास ने साफ कर दिया है कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं. उन्होंने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि यह मामला केवल किसी एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि बिहार प्रदेश कांग्रेस के अस्तित्व और सम्मान का है.

विश्वास के अनुसार, राज्यसभा उम्मीदवार तय करने से पहले न तो स्थानीय विधायकों की राय ली गई और न ही प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लिया गया. उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि जब हमारे प्रदेश नेतृत्व का ही सम्मान नहीं हुआ, तो हम इस फैसले के साथ कैसे खड़े हो सकते थे?

राहुल गांधी से मिलने की तैयारी

पार्टी द्वारा जारी अनुशासन के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज विश्वास ने कहा कि वे नोटिस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने जवाब में उन्हीं बातों को दोहराएंगे जो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कही हैं. यानी प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय इकाई की अनदेखी. हालांकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे आज भी खुद को कांग्रेसी मानते हैं और पार्टी के साथ रहेंगे.

अगर प्रदेश स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई, तो वे तीनों बागी विधायक दिल्ली जाकर राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर अपनी पूरी बात रखेंगे.

उम्मीदवार चयन पर उठे गंभीर सवाल

मनोज विश्वास ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों उम्मीदवार तय करते समय प्रदेश अध्यक्ष को दरकिनार किया गया? यही कारण है कि 16 मार्च को हुए मतदान के दौरान उन्होंने विरोध का रास्ता चुना. मनोज विश्वास का कहना है कि वे अपनी बात पर कायम हैं और पार्टी जो भी कार्रवाई करना चाहे, वे उसका सामना करने को तैयार हैं, लेकिन वे ‘जी-हुजूरी’ की राजनीति नहीं करेंगे.

मनोज विश्वास, सुरेंद्र प्रसाद और मनोहर प्रसाद सिंह का यह साझा रुख पार्टी के लिए गले की हड्डी बन गया है. अब देखना यह होगा कि 48 घंटे के भीतर मिलने वाले जवाब के बाद कांग्रेस आलाकमान इन विधायकों पर गाज गिराता है या फिर ‘सम्मान’ की इस लड़ाई में कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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