बिटकॉइन की छलांग, $75,000 के करीब पहुंचा भाव, क्या संकट में सोना पड़ रहा है फीका ?

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अब बिटकॉइन बना निवेशकों का नया ‘सुरक्षित ठिकाना’ (फोटो/Canva)

CoinDCX के सुमित गुप्ता बताते हैं कि हाल के हफ्तों में बिटकॉइन ईटीएफ (ETFs) में $2 बिलियन से ज्यादा का निवेश आया है

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Bitcoin: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है. तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं और महंगाई का डर फिर से सताने लगा है. लेकिन इस बार सुरक्षित निवेश की तलाश सिर्फ सोने (Gold) या डॉलर तक सीमित नहीं है, क्रिप्टोकरेंसी भी अब इस रेस में मजबूती से कदम रख रही है.

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क्या संकट के समय बिटकॉइन अब नया सहारा है ?

जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक ऐसी जगह पैसा लगाना चाहते हैं जो सुरक्षित रहे. CoinDCX के सुमित गुप्ता बताते हैं कि हाल के हफ्तों में बिटकॉइन ईटीएफ (ETFs) में $2 बिलियन से ज्यादा का निवेश आया है. यह इशारा करता है कि निवेशक अब बिटकॉइन को केवल एक रिस्क वाले निवेश के तौर पर नहीं, बल्कि एक ‘हेज’ (बचाव के रास्ते) के रूप में देख रहे हैं.

सोना बनाम बिटकॉइन: क्या पसंद बदल रही है ?

सालों से ‘गोल्ड’ को संकट का साथी माना जाता रहा है, लेकिन इस बार कुछ अलग हो रहा है.

  • गोल्ड ईटीएफ: इनमें से पैसा बाहर निकल रहा है.
  • बिटकॉइन ईटीएफ: इनमें लगातार पैसा आ रहा है.

हालांकि, यूनोकॉइन (Unocoin) के सात्विक विश्वनाथ का मानना है कि बिटकॉइन अभी पूरी तरह सोने जैसा ‘सेफ हेवन’ नहीं बना है. उनके अनुसार, यह एक “कंडीशनल सेफ हेवन” है, यानी संकट आने पर यह पहले गिरता है और फिर बहुत तेजी से रिकवर करता है.

क्रिप्टो की ताकत: 24 घंटे खुला बाजार

जब युद्ध या तनाव जैसी खबरें आती हैं, तो शेयर बाजार बंद हो सकते हैं, लेकिन क्रिप्टो मार्केट 24/7 खुला रहता है. सुमित गुप्ता कहते हैं कि यह लगातार खुली रहने वाली लिक्विडिटी निवेशकों को अपनी रणनीति बदलने का मौका देती है, जो संकट के समय एक बड़ा प्लस पॉइंट है.

इस बार की तेजी में आम जनता (Retail Investors) से ज्यादा बड़े संस्थानों और कंपनियों का हाथ है. आम निवेशक अभी भी थोड़े सावधान हैं और सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं, जबकि बड़ी संस्थाएं ईटीएफ के जरिए भारी निवेश कर रही हैं.

क्या यह तेजी टिकी रहेगी ?

सबसे बड़ा सवाल यही है. विशेषज्ञों का मानना है कि: बिटकॉइन की सीमित सप्लाई इसे महंगाई के खिलाफ एक अच्छा हथियार बनाती है. तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की वजह से अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो क्रिप्टो पर दबाव भी आ सकता है.

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