आईपीएल 2026 में बनेगा नया रिकाॅर्ड, 10 भारतीय कप्तानों के साथ होगा लीग का आगाज

Edited by Rajneesh Anand
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आईपीएल 2026

IPL 2026 : आईपीएल के इतिहास पर अगर गौर करें, तो हम पाएंगे कि शुरुआत में फ्रेंचाइजी टीमों के कप्तान विदेशी ज्यादा थे और उनके ओनर विदेशी खिलाड़ियों पर ज्यादा भरोसा करते थे. धीरे–धीरे ट्रेंड बदला और युवा खिलाड़ियों ने टीम के ओनर्स का भरोसा जीत लिया. आज स्थिति यह है कि आईपीएल 2026 की शुरुआत 10 में से 10 भारतीय कप्तानों के साथ हो रही है.

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IPL 2026 : आईपीएल 2026 का आगाज 28 मार्च को होने जा रहा है. पहला मैच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच बेंगलुरु में खेला जाएगा. 12 अप्रैल तक पहले चरण का मैच खेला जाएगा, जिसका शेड्‌यूल जारी कर दिया गया है. इस बार के आईपीएल की एक खास बात यह है कि लीग की शुरुआत में सभी फ्रेंचाइजी टीमों के कप्तान भारतीय होंगे.

आईपीएल की सभी 10 टीमों का नेतृत्व करेंगे भारतीय कप्तान

टीमकप्तानदेश
मुंबई इंडियंसहार्दिक पांड्याभारत
चेन्नई सुपर किंग्सऋतुराज गायकवाड़भारत
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोररजत पाटीदारभारत
कोलकाता नाइट राइडर्सअजिंक्य रहाणेभारत
दिल्ली कैपिटल्सअक्षर पटेलभारत
राजस्थान रॉयल्सरियान परागभारत
पंजाब किंग्सश्रेयस अय्यरभारत
गुजरात टाइटंसशुभमन गिलभारत
लखनऊ सुपर जायंट्सऋषभ पंतभारत
सनराइजर्स हैदराबादपैट कमिंस (नियमित) / ईशान किशन (शुरुआती मैचों में)ऑस्ट्रेलिया / भारत
आईपीएल 2026 के कप्तानों की सूची

आईपीएल के 19वें सीजन में एक खास बात यह हो रही है कि लीग के सभी 10 टीमों की कप्तानी भारतीय खिलाड़ी करने वाले हैं. हालांकि ऐसा नहीं है कि सभी 10 टीमों के कप्तान इस बार भारतीय हैं, 9 टीम का नेतृत्व भारतीय कप्तान कर रहे हैं जबकि 1 टीम के कप्तान विदेशी हैं. सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस हैं, लेकिन अभी वे चोटिल हैं इसलिए ईशान किशन उनकी जगह शुरुआत के कुछ मैचों में कप्तानी करने वाले हैं.

2025 में 8 भारतीय कप्तान कप्तान थे

दौरटीमों की संख्याभारतीय कप्तानविदेशी कप्तानट्रेंड
2008–201282–35–6विदेशी दबदबा
2013–2017844संतुलन
2018–202186–71–2भारतीय उभार
2022–2024107–82–3भारतीय दबदबा
20251082लगभग भारतीय
2026109+0–1लगभग 100% भारतीय

आईपीएल के 18वें सीजन में 10 टीमों में से 8 के कप्तान भारतीय थे, जबकि दो टीम का नेतृत्व विदेशी खिलाड़ी कर रहे थे. हालांकि आईपीएल के शुरुआती दौर में यानी 2008 से 2012 तक विदेशी कप्तानों का दौर था और 8 टीमों में से 5–6 के कप्तान विदेशी खिलाड़ी रहे थे. 2012 के बाद देसी–विदेशी कप्तानों का संतुलन बना और धीरे–धीरे भारतीयों कप्तानों ने अपनी पकड़ बना ली. महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे कप्तानों ने ओनर्स का भरोसा बढ़ा दिया और यहीं से शुरू हुआ भारतीय कप्तानों का दौर.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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