प्रशांत किशोर ने पटना हॉस्टल कांड में SIT और थानाध्यक्ष निलंबन का लिया श्रेय, अब सड़क से सरकार को घेरने की तैयारी

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प्रशांत किशोर ने पटना हॉस्टल कांड में SIT और थानाध्यक्ष निलंबन का लिया श्रेय, अब सड़क से सरकार को घेरने की तैयारी

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है. SIT के गठन और थानाध्यक्ष के निलंबन को अपनी जीत बताते हुए प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि अब उनकी लड़ाई सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क पर उतरेगी.

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Bihar Politics: जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने SIT के गठन और थानाध्यक्ष के निलंबन को जनता के दबाव और अपने आंदोलन की बड़ी सफलता बताया है. उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि जब लोग आवाज उठाते हैं तो सत्ता को झुकना पड़ता है.

अब उन्होंने ऐलान किया है कि सरकार की जवाबदेही तय कराने के लिए वे सड़क पर उतरेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे. उनके इस बयान ने बिहार की सियासत को नया मोड़ दे दिया है.

जनता की ताकत से हुआ बदलाव

प्रशांत किशोर ने कहा कि SIT का गठन और संबंधित थानाध्यक्ष का निलंबन किसी सरकार की स्वेच्छा से नहीं, बल्कि जनता के दबाव से हुआ है. उन्होंने इसे आम लोगों की जीत करार देते हुए कहा कि यह दिखाता है कि सिस्टम पर दबाव बनाया जाए तो बदलाव संभव है.

उनका दावा है कि अगर समय रहते आवाज न उठाई जाती, तो मामला फाइलों में दबा रह जाता. अब सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी है, जो अपने आप में एक बड़ा संदेश है.

सड़क पर उतरने का एलान, आंदोलन को मिलेगी धार

प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होगी. उनका कहना है कि जब तक पीड़ितों को न्याय और व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इसके लिए वे खुद सड़क पर उतरकर लोगों के साथ खड़े होंगे.

उन्होंने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति तभी सुधरेगी, जब जनता सवाल पूछेगी और सत्ता को जवाब देना पड़ेगा.

सरकार पर सीधा हमला

प्रशांत किशोर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर व्यवस्था दुरुस्त होती, तो SIT और निलंबन की नौबत ही नहीं आती. उन्होंने इसे सिस्टम की विफलता का प्रमाण बताया. उनका आरोप है कि सरकार अक्सर दबाव बनने के बाद ही कार्रवाई करती है, जबकि पहले से सतर्कता और संवेदनशीलता होनी चाहिए.

प्रशांत किशोर का सड़क पर उतरने का एलान सरकार के लिए नई चुनौती है. इससे विपक्ष को भी एक नया मुद्दा मिल सकता है और राज्य की राजनीति में दबाव की राजनीति तेज हो सकती है. यह कदम उन्हें केवल रणनीतिकार नहीं, बल्कि जमीनी आंदोलनकर्ता के रूप में भी स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है.

जन सुराज की रणनीति

प्रशांत किशोर लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका अभियान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन है. SIT और थानाध्यक्ष के निलंबन का श्रेय लेकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि जन सुराज जनता की आवाज बन सकता है. अब नजर इस बात पर है कि उनका सड़क पर उतरने का एलान कितना असरदार होता है और क्या यह आंदोलन बिहार की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव ला पाता है या नहीं.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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