ePaper

Bihar News: बिहार में हर दिन 776 लोगों को काट रहा आवारा कुत्ता, आर्थिक सर्वे के आंकड़ों ने उड़ाई नींद

Updated at : 03 Feb 2026 9:25 AM (IST)
विज्ञापन
Stray dogs bite 776 people every day in Bihar

Stray dogs bite 776 people every day in Bihar

Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य संकट की परिभाषा बदलती दिख रही है. राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 बताता है कि 2024–25 के दौरान कुत्ते के काटने के 2.83 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए. औसतन हर दिन 776 लोग इस खतरे का शिकार हुए. हैरानी की बात यह है कि सर्वे में कुत्ते के काटने को राज्य की सबसे ‘व्यापक बीमारी’ करार दिया गया है, जो कई संक्रामक रोगों से भी ऊपर पहुंच गई है.

विज्ञापन

Bihar News: बिहार में इन दिनों सबसे बड़ी बीमारी कैंसर या टीबी नहीं, बल्कि ‘कुत्ते का काटना’ (Dog Bite) बनकर उभरी है.

राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए ताजा आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने एक ऐसा डरावना सच सामने रखा है. राज्य में आवारा कुत्तों का कहर इस कदर बढ़ गया है कि अब यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है.

हर साल बढ़ता डर

आर्थिक सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 2023–24 में कुत्ते के काटने के 2,44,367 मामले दर्ज हुए थे, जो अगले ही साल बढ़कर 2,83,274 हो गए. यानी सिर्फ एक साल में करीब 39 हजार मामलों की बढ़ोतरी. यह इशारा करता है कि आवारा कुत्तों की समस्या अब शहरी ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी गंभीर होती जा रही है.

राजधानी पटना टॉप पर, कुछ जिले राहत में

कुत्ते के काटने के मामलों में पटना सबसे आगे रहा, जहां 29,280 लोग शिकार हुए. इसके बाद पूर्वी चंपारण, नालंदा और गोपालगंज जैसे जिले आते हैं.

दूसरी तरफ औरंगाबाद में सिर्फ 467 मामले दर्ज हुए, जो राज्य में सबसे कम हैं. यह अंतर बताता है कि स्थानीय प्रशासन, जनसंख्या घनत्व और आवारा कुत्तों की संख्या सीधे तौर पर मामलों को प्रभावित कर रही है.

रेबीज का खतरा, लेकिन आंकड़ों में चुप्पी

रिपोर्ट में रेबीज के मामलों का अलग से जिक्र नहीं है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल दुनिया में लगभग 59 हजार मौतें रेबीज से होती हैं और इनमें अधिकांश मामले संक्रमित कुत्तों के काटने से जुड़े होते हैं.

रेबीज ऐसा रोग है जिसमें लक्षण दिखने के बाद इलाज संभव नहीं होता, इसलिए समय पर टीकाकरण ही एकमात्र बचाव है.

सिर्फ कुत्ते नहीं, सांप भी बना जानलेवा

आर्थिक सर्वे में यह भी सामने आया कि 2024–25 में सांप के काटने से बिहार में 138 लोगों की मौत हुई. यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में जंतुजनित खतरे सिर्फ डर नहीं, बल्कि सीधे जीवन पर असर डाल रहे हैं.

कुत्ते के काटने को ‘बीमारी’ कहना भले अजीब लगे, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह बिहार के लिए एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है. सवाल है—क्या आवारा कुत्तों के नियंत्रण और टीकाकरण पर अब ठोस नीति बनेगी या हर दिन 776 लोगों की यह गिनती और बढ़ती जाएगी?

Also Read: Elevated Railway Track: बिहार में बुलेट ट्रेन के लिए बनेगा 500 किमी लंबा एलिवेटेड ट्रैक, 5 साल का लक्ष्य तय

विज्ञापन
Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन