नॉन-एकडमिक वर्क से टीचरों मिली आजादी, 5500 शिक्षकों को मिलेगा तीन माह का वेतन

Updated at : 11 Feb 2026 9:11 AM (IST)
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Bihar News: अब बिहार के टीचर सिर्फ पढ़ाएंगे, कागजी काम नहीं करेंगे? शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में संकल्प प्रस्तावों का जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के टीचरों को अब नॉन-एकडमिक वर्क में नहीं लगाया जाएगा. सरकार का पूरा ध्यान अब पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर है, ताकि टीचर केवल बच्चों के भविष्य संवारने पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

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Bihar News: बिहार विधान परिषद की दूसरी पाली में संकल्प प्रस्तावों पर हुई चर्चा के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार का रुख सामने आया. विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में हुई इस चर्चा में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने साफ किया कि राज्य के टीचरों को नॉन-एकडमिक वर्क में लगाने पर रोक है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं.

साथ ही वित्त रहित और सरकार से फंडेड शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के वेतन से जुड़े प्रस्तावों पर भी सरकार की स्थिति स्पष्ट की गई.

नॉन-एकडमिक वर्क में नहीं लगेंगे स्कूल टीचर

डॉ. वीरेंद्र नारायण यादव द्वारा टीचरों को नॉन-एकडमिक वर्क से मुक्त करने के संकल्प प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस संबंध में विभाग गंभीर है. उन्होंने बताया कि नॉन-एकडमिक वर्क में लगाए गए टीचरों की सूची मंगाई गई है और नियुक्ति पर रोक पहले ही लगाई जा चुकी है.

यदि इसके बावजूद कहीं टीचर नॉन-एकडमिक वर्क में लगाए जाते हैं तो वे विभाग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

टीचरों के वेतन पर बनी कमेटी

वित्त रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों के टीचर व नॉन-एकडमिक कर्मचारियों को वेतनमान देने के प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है. समिति की बैठक शीघ्र होने वाली है, जिसके बाद इस दिशा में निर्णय लिया जाएगा.सरकार का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा.

5500 टीचरों को एकमुश्त तीन माह का वेतन

सरकार से फंडेड मदरसा और संस्कृत विद्यालयों में नियुक्त टीचरों की वेतन संरचना को लेकर भी सदन में चर्चा हुई. शिक्षा मंत्री ने बताया कि पूर्व में लिए गए निर्णयों के अनुरूप सरकार काम कर रही है. इसी क्रम में अनुकंपा के आधार पर बहाल करीब 5500 टीचरों को एकमुश्त तीन माह का वेतन देने की तैयारी की जा रही है, जिससे लंबे समय से लंबित भुगतान की समस्या दूर हो सके.

महिला दिवस पर सरकारी अवकाश, पंचायत प्रतिनिधियों को आर्म्स लाइसेंस, मानदेय वृद्धि, बेरोजगारी भत्ता और नए जिले या अनुमंडल बनाने जैसे प्रस्तावों पर संबंधित मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि कई मामलों में फिलहाल कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है, जबकि कुछ मुद्दों पर भविष्य में विचार की बात कही गई है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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