Bihar News: डिजिटल दुनिया में मैथिली को मिली नई पहचान, गूगल कीबोर्ड पर जल्द उपलब्ध होगी तिरहुत लिपि

Maithili gets a new identity in the digital world
Bihar News: अब मोबाइल पर मैथिली लिखना सिर्फ भावना नहीं, पहचान भी बनेगा. डिजिटल इंडिया के दौर में मैथिली भाषा को उसकी अपनी लिपि के साथ नई जगह मिलने जा रही है, जो करोड़ों मैथिली भाषियों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है.
Bihar News: केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्षेत्रीय भाषाओं को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. तिरहुत/वैदेही लिपि को गूगल कीबोर्ड और एंड्रॉइड-आईओएस जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की इस घोषणा के बाद मैथिली भाषियों में उत्साह है. यह पहल न सिर्फ तकनीकी सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि डिजिटल युग में मैथिली की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ताकत देगी.
डिजिटल मंच पर मैथिली की बड़ी एंट्री
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्षेत्रीय भाषाओं की मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम और सकारात्मक कदम उठाया है. मैथिली भाषा को अब डिजिटल दुनिया में नई पहचान मिलने जा रही है.
तिरहुत या वैदेही लिपि को गूगल कीबोर्ड और एंड्रॉइड-आईओएस जैसे प्रमुख मोबाइल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है. इस पहल को मैथिली भाषियों के लिए सांस्कृतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने खुद इस महत्वपूर्ण पहल की जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि तिरहुत/वैदेही लिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं पर तेजी से काम हो रहा है. सरकार की यह कोशिश डिजिटल इंडिया के उस विजन से जुड़ती है, जिसमें हर भाषा और हर समुदाय को तकनीक से जोड़ने की बात कही गई है.
मैथिली भाषियों के लिए क्यों अहम है यह कदम
अब तक मैथिली बोलने-लिखने वाले लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी भाषा में संवाद करने में कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. देवनागरी या रोमन लिपि के सहारे मैथिली लिखी जाती रही, जिससे भाषा की मौलिक पहचान कहीं न कहीं कमजोर पड़ती रही. तिरहुत लिपि की डिजिटल उपलब्धता से न सिर्फ भाषा की शुद्धता बनी रहेगी, बल्कि नई पीढ़ी भी अपनी पारंपरिक लिपि से जुड़ सकेगी.
भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान की रीढ़ होती है. तिरहुत लिपि के डिजिटल मंच पर आने से साहित्य, लोककथाएं, गीत, शोध और शैक्षणिक सामग्री को ऑनलाइन साझा करना आसान होगा. सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म पर मैथिली की मौजूदगी बढ़ेगी, जिससे यह भाषा डिजिटल युग में और सशक्त होगी.
मैथिली आंदोलन की एक लंबी लड़ाई का नतीजा
यह फैसला उन तमाम भाषाविदों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों का परिणाम है, जो वर्षों से मैथिली को उसकी मूल लिपि के साथ डिजिटल मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे. अब जब सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल की है, तो उम्मीद है कि आने वाले समय में मैथिली को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर और अधिक स्थान मिलेगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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