जीविका दीदियों के ड्रेस कोड–ID कार्ड मुद्दे पर मंत्री श्रवण कुमार का जवाब, स्नेहलता कुशवाहा ने उठाए सवाल

Updated at : 11 Feb 2026 12:14 PM (IST)
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Shravan Kumar replied to Snehlata Kushwaha's question.

Shravan Kumar replied to Snehlata Kushwaha's question.

Bihar News: सासाराम से विधायक स्नेहलता कुशवाहा ने सदन में जीविका दीदियों की विशिष्ट पहचान और सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया, जिस पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के जवाब ने सबको चौंका दिया.

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Bihar News: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को जीविका दीदियों के ड्रेस कोड और आईडी कार्ड का मुद्दा प्रमुखता से उठा. सासाराम से विधायक स्नेहलता कुशवाहा ने सदन में मांग की कि राज्यभर में काम कर रहीं जीविका दीदियों को एक निर्धारित ड्रेस कोड और आधिकारिक पहचान पत्र दिया जाए, ताकि उनकी स्पष्ट पहचान सुनिश्चित हो सके.

मंत्री श्रवण कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि ड्रेस कोड लागू करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, लेकिन उनके उत्तर ने नए सवाल खड़े कर दिए.

पहचान का सवाल, जवाब सुरक्षा पर

विधायक स्नेहलता ने अपने प्रश्न में कहा कि जीविका दीदियों को पहचान पत्र जारी किया जाना चाहिए. उनका तर्क था कि गांव-गांव में काम करने वाली इन महिलाओं की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए. मंत्री श्रवण कुमार ने जवाब में कहा कि ड्रेस कोड के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसे जल्द पूरा किया जाएगा.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जीविका दीदियों की सुरक्षा को लेकर किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे महिलाओं को जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं.

मंत्री के जवाब पर क्यों खड़ी हुई उलझन

स्नेहलता ने सदन में कहा कि वर्तमान में जीविका दीदियों से सरकारी कार्यालयों, पंचायतों और अन्य संस्थानों में उनके आधिकारिक पहचान पत्र मांगे जाते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में उन्हें आई कार्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. इसके चलते उन्हें प्रवेश से लेकर समन्वय तक कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

उनका जोर इस बात पर था कि यदि सरकार ड्रेस कोड और पहचान पत्र सुनिश्चित करती है तो न सिर्फ उनकी पहचान मजबूत होगी, बल्कि उनके काम की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी और फील्ड पर काम करना आसान होगा. यह मुद्दा उस व्यापक व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है जिसमें जमीनी कार्यकर्ता जिम्मेदारियां तो निभाते हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक मान्यता देने में प्रशासनिक ढिलाई दिखती है.

मंत्री का जवाब सुनकर स्नेहलता ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल सुरक्षा नहीं, बल्कि पहचान पत्र निर्गत करने से जुड़ा है. इस पर सदन में हल्की नोकझोंक की स्थिति बन गई और मामला चर्चा का विषय बन गया.

माइक ने दिया दगा, तो आगे बढ़कर विधायक ने उठाई आवाज

सदन की कार्यवाही के दौरान तकनीकी दिक्कत भी चर्चा में रही. जब स्नेहलता कुशवाहा अपना पहला सवाल पूछने के लिए खड़ी हुईं तो उनका माइक काम नहीं कर रहा था. उन्होंने कई माइक पर बोलने की कोशिश की, लेकिन किसी की लाइट नहीं जली. अंततः उन्हें अपनी सीट छोड़कर आगे आना पड़ा, तब जाकर उन्होंने सवाल रखा. इस घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तंज कसा और इसे गंभीरता से लेने की मांग की.

जीविका दीदियों के ड्रेस कोड और आईडी कार्ड को लेकर अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है. यदि प्रस्ताव लागू होता है तो राज्यभर में कार्यरत लाखों जीविका दीदियों को एक औपचारिक पहचान मिलेगी, जिससे उनकी विश्वसनीयता और कामकाज दोनों मजबूत होंगे.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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