जमालपुर में पहाड़ों के बीच बनेगी सुपर टनल, 1094 करोड़ की लागत से बदलेगा रेल सफर

Updated at : 01 Apr 2026 12:46 PM (IST)
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Bihar News

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: जमालपुर-रतनपुर रेलखंड पर तीसरी सुरंग निर्माण की दिशा में कदम उठाया गया है. करीब 1094 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सुरंग ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और कंजेशन कम करने में अहम भूमिका निभाएगी. फिलहाल फॉरेस्ट विभाग के साथ संयुक्त सर्वे शुरू हो चुका है और जल्द ही आगे की प्रक्रिया तेज होगी.

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Bihar News: जमालपुर-रतनपुर रेलखंड पर भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तीसरी रेल सुरंग के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है.1094 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सुरंग न केवल तकनीक का बेजोड़ नमूना होगी, बल्कि भागलपुर-किऊल रेलखंड के पूरे ट्रैफिक गणित को बदलकर रख देगी.

मालदा रेलमंडल ने इसके लिए वन विभाग के साथ ज्वाइंट सर्वे शुरू कर दिया है, जिससे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जल्द जमीन पर उतारने का रास्ता साफ हो गया है.

पहाड़ों के बीच बनेगी सुरंग

इस तीसरी सुरंग की बनावट भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. इसकी लंबाई लगभग 903 फीट होगी, जबकि चौड़ाई 26 फीट और ऊंचाई 23 फीट रखी गई है. इतनी भव्य ऊंचाई और चौड़ाई का उद्देश्य यह है कि हाई-स्पीड ट्रेनों और भारी मालगाड़ियों के आवाजाही में कोई तकनीकी अड़चन न आए.

इस सुरंग के भीतर आधुनिक लाइटिंग, वेंटिलेशन सिस्टम और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी निकास द्वार भी बनाए जाएंगे, जो इसे देश की सुरक्षित सुरंगों में से एक बनाएंगे.

ब्रिटिश काल से जुड़ा है इस रूट का इतिहास

जमालपुर की सुरंगों का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसकी शुरुआत 1861 में ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी. करीब 150 सालों तक पहली सुरंग ने अकेले ही इस रूट का बोझ संभाला, जिसके बाद 2022 में दूसरी सुरंग शुरू की गई.

अब तीसरी सुरंग के निर्माण से यहाँ ‘ट्रिपल ट्रैक’ जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी. वर्तमान में ट्रेनों को सुरंग पार करने के लिए काफी धीमी गति अपनानी पड़ती है और अक्सर सिग्नल मिलने का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन नई टनल बनने के बाद ट्रेनों की क्रॉसिंग और वेटिंग टाइम लगभग शून्य हो जाएगा.

पूर्वी भारत की नई कनेक्टिविटी

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाले प्रमुख रेल मार्ग के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा. जैसे ही फॉरेस्ट विभाग से एनओसी (NOC) प्राप्त होगी, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

रेलवे का लक्ष्य है कि इसी वित्तीय वर्ष में निर्माण कार्य को गति दी जाए. तीसरी सुरंग बनने से न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि मालगाड़ियों के सुगम चलने से रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी और नई पैसेंजर ट्रेनों के आने-जाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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