Bihar News: हिजाब-प्रकरण से सुर्खियों में आईं डॉ नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी, आज से पटना सिटी में देंगी सेवा

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Bihar News: जिस हिजाब ने डॉ नुसरत परवीन को सोशल मीडिया से लेकर सियासत तक की बहस का केंद्र बना दिया था, अब उसी डॉ नुसरत ने चुपचाप अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली है. 23 दिनों के इंतजार, विवाद और ऑफर्स के बाद आखिरकार उन्होंने बिहार में सेवा का रास्ता चुना.
Bihar News: हिजाब-प्रकरण को लेकर चर्चा में आईं आयुष चिकित्सक डॉ नुसरत परवीन ने बुधवार को अपनी सरकारी नौकरी ज्वाइन कर ली. मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के बाद वायरल हुए एक वीडियो के बाद वे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गई थीं.
तमाम राजनीतिक बयानबाजी और बाहरी राज्यों से मिले प्रस्तावों के बीच डॉ नुसरत ने बिहार स्वास्थ्य विभाग में योगदान देकर मामला शांत कर दिया है.
23 दिन बाद ज्वाइनिंग, अब पटना सदर पीएचसी में तैनाती
डॉ नुसरत परवीन सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग पहुंचीं, इसके बाद गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में योगदान दिया. सिविल सर्जन डॉ अविनाश कुमार ने पुष्टि की कि उनकी पोस्टिंग पटना सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में की गई है. अब वे पटना सिटी क्षेत्र में मरीजों की सेवा करेंगी.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के बाद डॉ नुसरत परवीन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में वे हिजाब पहने नजर आईं, जिसके बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत आस्था से जोड़ा, तो कुछ ने इसे सरकारी सेवा से जोड़कर सवाल उठाए.
झारखंड से मिला था मोटा ऑफर
विवाद के बीच झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ नुसरत परवीन को झारखंड में तीन लाख रुपये मासिक वेतन पर नौकरी का सार्वजनिक ऑफर दिया था. यह ऑफर चर्चा का बड़ा विषय बन गया और माना जाने लगा कि डॉ नुसरत बिहार छोड़ सकती हैं.
ज्वाइनिंग की तारीखें बढ़ती रहीं
डॉ नुसरत की ज्वाइनिंग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही. पहले 20 दिसंबर को अंतिम तिथि तय की गई थी, फिर इसे 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया. इसके बाद 7 जनवरी को अंतिम मौका दिया गया. इस दौरान उसी बैच के 63 अन्य आयुष चिकित्सक पहले ही योगदान दे चुके थे.
आखिरकार डॉ नुसरत परवीन ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए बिहार में नौकरी ज्वाइन कर ली. उनका यह कदम बताता है कि तमाम विवादों के बावजूद उन्होंने पेशेवर जिम्मेदारी और सेवा को प्राथमिकता दी.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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