Bihar News: बिहार के मरीजों को अब जिलों में ही मिलेगा सुपर स्पेशियलिटी इलाज, नीतीश सरकार का बड़ा हेल्थ मिशन

Updated at : 15 Jan 2026 12:19 PM (IST)
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super-specialty treatment in districts,

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Bihar News: जिस इलाज के लिए अब तक पटना, दिल्ली या बड़े शहरों की दौड़ लगानी पड़ती थी, वह सुविधा अब अपने जिले और प्रखंड में ही मिलेगी. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था इतिहास के सबसे बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है.

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Bihar News: गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए राहत की बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार के ‘सात निश्चय-3’ के तहत बिहार के सरकारी अस्पतालों को आधुनिक और बहु-विशेषज्ञ सुविधाओं से लैस करने की तैयारी शुरू हो गई है.

अगले पांच वर्षों में राज्य के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्पेशलिटी अस्पताल और जिला अस्पताल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किए जाएंगे. इसका सीधा फायदा यह होगा कि अब बेहतर इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा.

पांच साल में पूरी तरह बदल जाएगी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था

राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना को वर्ष 2025 से 2030 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. इसके अंतर्गत राज्य के 534 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 36 जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में बदला जाएगा. स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि हर जिले में अत्याधुनिक इलाज की सुविधा उपलब्ध हो, ताकि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों के मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके.

यह बदलाव सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इलाज की गुणवत्ता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और आधुनिक जांच सुविधाओं के स्तर पर भी क्रांतिकारी साबित होगा.

जिला अस्पताल बनेंगे सुपर स्पेशलिटी हब

जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में बदले जाने के बाद यहां सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, डेंटिस्ट के साथ-साथ इंडोक्रोनोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध होंगी.

यहां आईसीयू की उन्नत व्यवस्था, नवजात शिशुओं के इलाज की आधुनिक सुविधा, सभी प्रकार की पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल जांच, प्रसव से जुड़ी उच्च स्तरीय सुविधाएं और गंभीर बीमारियों के इलाज की संपूर्ण व्यवस्था होगी. इसका अर्थ है कि हार्ट, किडनी, दिमाग और मधुमेह से जुड़ी जटिल बीमारियों का इलाज अब जिला स्तर पर ही संभव हो सकेगा.

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खास व्यवस्था

हर जिला अस्पताल में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर यानी डीईआईसी की स्थापना की जाएगी. यहां शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों की समय रहते पहचान और इलाज होगा. इससे बच्चों में दिव्यांगता और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा.

प्रखंड स्तर पर भी मिलेगा स्पेशलिटी इलाज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनाए जाने के बाद प्रखंड स्तर पर ही क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, डाइटिशियन, डेंटल विशेषज्ञ, आयुष स्पेशलिस्ट, फिजिशियन और फार्मासिस्ट की सेवाएं उपलब्ध होंगी. इसके साथ ही यूरोलॉजी, ईसीजी, ओटी और डेंटल टेक्निशियन की तैनाती से मध्यम स्तर की जटिल बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगा.

सभी जिला अस्पतालों में बनने वाले डीईआईसी का सीधा जुड़ाव पटना स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से रहेगा. यहां से इलाज की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और सेवाओं की नियमित निगरानी की जाएगी. साथ ही प्रशिक्षण और शोध की व्यवस्था से स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश होगी.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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