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Bihar News: अब बिहार में सजेगा बॉलीवुड का मंच! निर्माताओं की पसंद पर बनेगी हाईटेक फिल्म सिटी

Bihar News: जिस बिहार को अब तक सिनेमा के नक्शे में हाशिये पर देखा जाता था, वही राज्य अब कैमरे की फोकस में आने को तैयार है. फिल्म सिटी से लेकर ड्रामा इंस्टीट्यूट और शूटिंग पोर्टल तक. बिहार सरकार ने सिनेमा और सांस्कृतिक विरासत को लेकर बड़ा दांव खेला है.

Bihar News: बिहार में सिनेमा, वेबसीरीज और रंगमंच की दुनिया को नया आधार देने की तैयारी तेज हो गई है. राज्य की पहली फिल्म सिटी का निर्माण अब किसी तयशुदा ढांचे पर नहीं, बल्कि फिल्म निर्माताओं की जरूरतों और उनके दिए गए प्रस्तावों के अनुरूप किया जाएगा.

इसके साथ ही बिहार फिल्म एवं ड्रामा संस्थान की स्थापना और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण की योजनाएं राज्य के सांस्कृतिक भविष्य की नई तस्वीर पेश कर रही हैं.

फिल्म निर्माताओं की पसंद बनेगा ‘नया बिहार’

राज्य सरकार की योजना एक ऐसी फिल्म सिटी विकसित करने की है जो तकनीकी रूप से उन्नत हो और जहां निर्माताओं को हर जरूरी सुविधा एक ही छत के नीचे मिले. इसके लिए बाकायदा निर्माताओं से प्रस्ताव मांगे गए हैं ताकि उनकी जरूरतों के अनुसार स्टूडियो, पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट्स और आउटडोर लोकेशन्स को विकसित किया जा सके.

जल्द ही एक समर्पित पोर्टल भी लॉन्च होने वाला है, जिससे फिल्म निर्माण से जुड़ी स्वीकृतियां लेना और लोकेशन की बुकिंग करना बेहद आसान हो जाएगा. इससे बड़े प्रोडक्शन हाउस अब बिहार की ओर रुख करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

अभिनय की बारीकियां सिखाएगा अपना ड्रामा संस्थान

बिहार ने देश को कई दिग्गज कलाकार दिए हैं, लेकिन पेशेवर शिक्षा के लिए उन्हें हमेशा दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था. इस कमी को दूर करने के लिए ‘बिहार फिल्म एवं ड्रामा संस्थान’ की स्थापना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है यहां अभिनय, रंगमंच और फिल्म निर्माण से जुड़ी पेशेवर शिक्षा दी जाएगी.

यह संस्थान बिहार के युवाओं के लिए एक ऐसा केंद्र बनेगा जहाँ वे विश्व स्तरीय गुरुओं से अभिनय की बारीकियां सीख सकेंगे. इससे स्थानीय प्रतिभाओं को पॉलिश किया जा सकेगा और उन्हें फिल्म जगत की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा.

गुरु-शिष्य परंपरा से कला को मिलेगा नया जीवन

विलुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं को बचाने के लिए सरकार ने ‘मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना’ की शुरुआत की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राचीन कला रूपों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है. विभाग को अब तक इसके लिए 233 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जो इस योजना की लोकप्रियता को दर्शाता है.

इसके माध्यम से वरिष्ठ कलाकार अपने शिष्यों को पारंपरिक विधाओं में प्रशिक्षित करेंगे, जिससे बिहार की लोक संस्कृति का अस्तित्व बना रहेगा. यह योजना केवल कला संरक्षण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम है.

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Pratyush Prashant
Pratyush Prashant
कंटेंट एडिटर और तीन बार लाड़ली मीडिया अवॉर्ड विजेता. जेंडर और मीडिया विषय में पीएच.डी. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में कार्यरत. डेवलपमेंट, ओरिजनल और राजनीतिक खबरों पर लेखन में विशेष रुचि. सामाजिक सरोकारों, मीडिया विमर्श और समकालीन राजनीति पर पैनी नजर. किताबें पढ़ना और वायलीन बजाना पसंद.

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