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Bihar Bhumi: अब रजिस्ट्री से पहले जमीन की लाइव तस्वीर, नई तकनीक से भू-माफिया पर लगेगी लगाम

Updated at : 01 Jan 2026 11:46 AM (IST)
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Bihar Bhumi

AI जनरेटेड इमेज प्रतीकात्मक तस्वीर

Bihar Bhumi: जिस जमीन की रजिस्ट्री करा रहे हैं, वह वही है या नहीं, अब यह शक नहीं रहेगा. एक क्लिक में फोटो, लोकेशन और मालिकाना हक सब कुछ सामने होगा.

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Bihar Bhumi: बिहार में जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों पर लगाम लगाने की तैयारी है. राज्य सरकार रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने जा रही है.

इसके तहत किसी भी जमीन, मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान या फ्लैट की रजिस्ट्री से पहले उसकी वास्तविक तस्वीर अक्षांश-देशांतर के साथ सरकारी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी. तस्वीर अपलोड होने के बाद ही रजिस्ट्री संभव होगी. मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग इसके लिए नया सॉफ्टवेयर विकसित करा रहा है.

अब पहले दिखेगी जमीन, फिर होगी रजिस्ट्री

नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री के समय सिर्फ कागजात ही नहीं, बल्कि जमीन की वास्तविक स्थिति भी सिस्टम में दर्ज होगी. जैसे ही लोकेशन आधारित तस्वीर अपलोड होगी, सॉफ्टवेयर यह भी जांच लेगा कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है.

यदि कोई भू-माफिया या दूसरा व्यक्ति उसी जमीन को दोबारा बेचने की कोशिश करेगा तो रजिस्ट्री वहीं रुक जाएगी. इससे फर्जी बिक्री और दोहरी रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है.

मौजूदा सिस्टम की खामी होगी दूर

अभी जमीन की रजिस्ट्री से पहले जीपीएस कैमरा से सत्यापन किया जाता है, लेकिन कई बार लोकेशन एक किलोमीटर आगे-पीछे दिख जाती है. ग्रामीण इलाकों में यह समस्या ज्यादा सामने आती है, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती. नए सॉफ्टवेयर में जमीन की ऑन-स्पॉट तस्वीर और सटीक लोकेशन अपलोड होने से यह दिक्कत खत्म हो जाएगी.

एसएमएस में मिलेगी जमीन की पूरी जानकारी

नई तकनीक के तहत रजिस्ट्री पूरी होते ही खरीदार के मोबाइल पर भेजे जाने वाले एसएमएस में जमीन की पूरी जानकारी फोटो के साथ उपलब्ध होगी. खरीदार इस दस्तावेज को डाउनलोड कर सरकारी रिकॉर्ड के रूप में उपयोग कर सकेगा. अलग से कार्यालय जाकर कॉपी निकलवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

दाखिल-खारिज भी होगा आसान

निबंधन विभाग का दावा है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद रजिस्ट्री होने वाली लगभग 60 प्रतिशत जमीन का दाखिल-खारिज ऑनलाइन हो सकेगा. इसके लिए ट्रायल किया जा चुका है और योजना लगभग तैयार है। सॉफ्टवेयर को पूरी तरह जोड़ने के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में होने वाली देरी और विवाद भी कम होंगे.

ट्रायल सफल, जल्द मिल सकती है हरी झंडी

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक दरभंगा समेत कई जिलों में इस नई व्यवस्था का ट्रायल किया गया है, जो सफल रहा. अब सरकार से अनुमति लेने के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी है. कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा.

आम लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

जमीन की वास्तविक तस्वीर और सटीक लोकेशन सिस्टम में दर्ज होने से खरीदार को वही जमीन मिलेगी, जिसके लिए उसने भुगतान किया है. गूगल मैप के जरिए लोकेशन जांचना आसान होगा और गड़बड़ी की संभावना काफी कम हो जाएगी. नई तकनीक से जमीन की खरीद-बिक्री ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनने जा रही है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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