बिहार के गांवों में ही अब होगी बीमारियों की पहचान, आशा-जीविका दीदी संभालेंगी जिम्मेदारी

Updated at : 05 Apr 2026 8:36 AM (IST)
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Bihar News 5 April 2026.

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. अब पंचायत स्तर पर ही बीमारियों की शुरुआती पहचान की जाएगी, ताकि मरीज गंभीर होने से पहले इलाज तक पहुंच सकें. इसके लिए आशा और जीविका दीदी को विशेष ट्रेनिंग देने की तैयारी शुरू हो गई है.

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Bihar News: बिहार की पंचायतों में अब स्वास्थ्य सुविधाओं का चेहरा बदलने वाला है. राज्य सरकार ने ग्रामीण स्तर पर बीमारियों की शुरुआती पहचान और इलाज के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है.

अब गली-मुहल्ले की आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदियां केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वह ‘बीमारी की शुरुआती पहचान करने वाले के रूप में काम करेंगी.

हीट वेव से निपटने के लिए खास तैयारी

बढ़ती गर्मी और लू (हीट वेव) के खतरों को देखते हुए सरकार ने सबसे पहले आशा और जीविका दीदियों को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है. अक्सर ग्रामीण इलाकों में लोग लू लगने या मौसमी बुखार के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में जानलेवा साबित होता है.

अब आशा-जीविका दीदी घर-घर जाकर मरीजों की पहचान करेंगी और उन्हें प्राथमिक उपचार के साथ-साथ नजदीकी अस्पताल रेफर करेंगी.

AI और डिजिटल सिस्टम से होगी निगरानी

बिहार सरकार इस बार केवल मैनपावर पर ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक पर भी भरोसा कर रही है. राज्य में हीट वेव और अन्य संक्रामक बीमारियों की रिपोर्टिंग को पुख्ता करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जाएगी. राज्य स्वास्थ्य समिति एक विशेष डिजिटल पोर्टल और डैशबोर्ड विकसित कर रही है, जिसे सीधे ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ से जोड़ा जाएगा.

आशा और जीविका दीदियां प्रतिदिन जो डेटा भेजेंगी, उसका एआई के जरिए विश्लेषण किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि किस इलाके में कौन सी बीमारी पैर पसार रही है.

ट्रेनिंग के दौरान आशा और जीविका दीदी को हर मौसम में होने वाली बीमारियों की पहचान सिखाई जाएगी. बारिश, ठंड या गर्मी—हर मौसम में फैलने वाली बीमारियों के लक्षणों को पहचानकर वे मरीजों को समय पर इलाज के लिए भेज सकेंगी. इससे गांव स्तर पर ही स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत होगी.

गांव-गांव बनेगा बीमारियों का अपना डेटाबेस

इस नई व्यवस्था के तहत हर पंचायत का अपना एक हेल्थ डेटाबेस तैयार होगा. ट्रेनिंग के दौरान दीदियों को सिखाया जाएगा कि कैसे अलग-अलग मौसम में होने वाली बीमारियों के लक्षणों को पहचानना है.

प्रतिदिन की रिपोर्टिंग से स्वास्थ्य विभाग को यह समझने में आसानी होगी कि किन क्षेत्रों में दवाओं और डॉक्टरों की अतिरिक्त जरूरत है. यह कदम न केवल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करेगा, बल्कि आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की बिहार की क्षमता को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा.

इससे न केवल इलाज आसान होगा बल्कि आपदा के समय तेजी से प्रतिक्रिया देना भी संभव होगा.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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