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Bihar History: आखिर क्यों पड़ा बिहार का नाम बिहार? पढ़िए इसके पीछे की पूरी कहानी

Updated at : 02 Sep 2025 4:17 PM (IST)
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old pics of bihar

सांकेतिक तस्वीर

Bihar History: बिहार राज्य से महान व्यक्तित्व जैसे महात्मा बुद्ध, महावीर, चाणक्य और आर्यभट्ट जुड़े हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार का नाम कैसे पड़ा और पहले इसे क्या कहा जाता था? पढ़िये पूरी कहानी.

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Bihar History: बिहार भारत का पूर्वी राज्य है जो अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है. जनसंख्या के लिहाज से देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार कई कारणों से प्रसिद्ध है. यह महात्मा बुद्ध, महावीर, चाणक्य और आर्यभट्ट जैसे महान लोगों से संबंधित है. बिहार की इतिहास बहुत समृद्ध और रोचक है. प्राचीन समय में इसे मगध के नाम से जाना जाता था. मगध उस समय भारत के 16 जनपदों में सबसे प्रमुख और शक्तिशाली राज्य था. यहां के राजा और साम्राज्य बहुत ताकतवर थे. मौर्य वंश के सम्राट अशोक ने मगध से ही अपने साम्राज्य का विस्तार किया. अशोक ने बौद्ध धर्म को बहुत मान्यता दी और इसे देश-विदेश में फैलाया. उन्होंने कई बौद्ध विहार और स्तूप बनवाए,जहां साधु-महात्मा ध्यान और शिक्षा के लिए आते थे.

बौद्ध विहारों से जुड़ा है बिहार

इन विहारों और बौद्ध धर्म के प्रभाव के कारण इस क्षेत्र को धीरे-धीरे ‘विहार’ कहा जाने लगा. समय के साथ यही नाम बदलकर बिहार बन गया. यानी, बिहार का नाम सीधे यहां के बौद्ध विहारों से जुड़ा है.

इस दिन मिला अधिकारिक नाम

बिहार राज्य को 1912 में अधिकारिक नाम मिला. उस दिन, 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसीडेंसी से बिहार और ओडिशा को अलग करके नया राज्य बनाया गया. पहले बिहार, बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था. बाद में, 1936 में ओडिशा को अलग करके अलग राज्य बना दिया गया.

बौद्ध मठों को कहते थे विहार

बिहार नाम बौद्ध विहारों से लिया गया है. “विहार” का मतलब होता है बौद्ध मठ या साधुओं का आश्रम, जहाँ साधु ध्यान, शिक्षा और धर्म का प्रचार करते थे. प्राचीन समय में यह क्षेत्र बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र था और यहाँ कई विहार बने हुए थे. लोग इन विहारों में शिक्षा और ध्यान के लिए आते थे. समय के साथ, लोगों ने इन बौद्ध मठों वाले क्षेत्रों को बस “विहार” के नाम से पुकारना शुरू किया. धीरे-धीरे यही शब्द बदलकर बिहार बन गया और आज यह राज्य इसी नाम से जाना जाता है.

अलग पहचान की उठी थी मांग

अंग्रेजों के शासन में बिहार उनके लिए सिर्फ आर्थिक स्रोत था. यह सीधे ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में था और कोलकाता से ही प्रशासन चलता था. बिहार की कृषि और राजस्व बहुत महत्वपूर्ण थी—यहां धान, गन्ना, नील और तंबाकू उगाए जाते थे. अंग्रेजों ने जमींदारों के जरिए वसूली की, जिससे किसानों पर भारी बोझ पड़ा और वे भुखमरी के कगार पर आ गए. संस्कृति और शिक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया. इसके कारण बिहार में अलग पहचान की मांग उठी. इसी का नतीजा था कि 22 मार्च 1912 को बिहार को अलग राज्य घोषित किया गया और बिहार को अलग पहचान मिली.

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JayshreeAnand

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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