बिहार के सरकारी दफ्तरों में बदलेगा कामकाज का तरीका, अब लंबी मीटिंग पर लगेगी रोक, जानिए नई गाइडलाइन

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AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर

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Bihar Government: बिहार के सरकारी दफ्तरों में अब कामकाज का तरीका बदलने वाला है. 'साहब मीटिंग में हैं' कहकर लोगों को लौटाने की समस्या कम होगी. सरकार ने अधिकारियों की बैठकों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है.

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Bihar Government: अगर आप किसी सरकारी कार्यालय में काम के लिए जाते हैं और अक्सर 'साहब मीटिंग में हैं' सुनकर वापस लौटना पड़ता है, तो आपके लिए राहत की खबर है. बिहार सरकार ने सरकारी कामकाज को तेज और ज्यादा जवाबदेह बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है.

अब अधिकारियों की लंबी बैठकों पर रोक लगाने की तैयारी है. सरकार का उद्देश्य है कि अधिकारियों का ज्यादा समय जनता की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान में लगे.

50 मिनट से ज्यादा नहीं चलेगी बैठक

सामान्य प्रशासन विभाग ने सरकारी कार्यालयों और सचिवालय के लिए 'गाइड ऑन कंडक्टिंग इफेक्टिव मीटिंग्स' जारी किया है. इसके अनुसार सामान्य परिस्थितियों में कोई भी बैठक 50 मिनट से अधिक नहीं चलेगी.

सरकार का मानना है कि लंबी बैठकों से समय की बर्बादी होती है. इसका असर आम लोगों के काम और सरकारी फाइलों के निपटारे पर पड़ता है.

बिना एजेंडे के नहीं बुलाई जाएगी बैठक

नई व्यवस्था के तहत अब हर बैठक का एजेंडा पहले से तय करना होगा. बैठक में शामिल होने वाले अधिकारियों को पहले ही एजेंडा नोट भेजा जाएगा.

इससे अधिकारी पूरी तैयारी के साथ बैठक में पहुंचेंगे और कम समय में जरूरी फैसले लिए जा सकेंगे. सरकार का कहना है कि बिना तैयारी वाली बैठकों से बचना जरूरी है.

फोन और ईमेल से हो सकने वाले काम के लिए नहीं होगी मीटिंग

गाइडलाइन में कहा गया है कि जिन मामलों का समाधान फोन, वीडियो कॉल या ईमेल के जरिए किया जा सकता है, उनके लिए बैठक नहीं बुलाई जाएगी. इससे अधिकारियों का समय बचेगा और वे जनता से जुड़े जरूरी कामों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे.

लंच टाइम और छुट्टी के समय नहीं होगी बैठक

सरकार ने यह भी तय किया है कि लंच ब्रेक या कार्यालय बंद होने के समय के आसपास बैठकें आयोजित नहीं की जाएंगी. इससे कर्मचारियों और अधिकारियों का समय बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो सकेगा. आम लोगों को भी कार्यालयों में अधिकारियों की उपलब्धता का फायदा मिलेगा.

बैठक में मोबाइल चलाने पर भी रोक

नई गाइडलाइन के अनुसार बैठक के दौरान अधिकारी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे. साथ ही ईमेल चेक करने से भी बचना होगा. इसका उद्देश्य है कि बैठक में शामिल सभी अधिकारी चर्चा पर पूरा ध्यान दें और समय पर बेहतर निर्णय लिया जा सके.

तीन दिन में जारी करनी होगी बैठक की रिपोर्ट

अब हर बैठक के बाद तीन दिनों के अंदर 'मिनट्स ऑफ मीटिंग' जारी करना अनिवार्य होगा. इसमें बैठक में लिए गए फैसले, अधिकारियों की जिम्मेदारी और काम पूरा करने की समय सीमा दर्ज होगी. इससे काम की निगरानी आसान होगी और जवाबदेही तय होगी.

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युवा अधिकारियों की ट्रेनिंग में भी शामिल होगी गाइडलाइन

सामान्य प्रशासन विभाग इस व्यवस्था को बिहार प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण में भी शामिल करने की तैयारी कर रहा है. इसका उद्देश्य अधिकारियों में समय प्रबंधन, बेहतर कार्यशैली और जवाबदेही की भावना विकसित करना है.

जनता को मिलेगा सीधा फायदा

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सरकारी दफ्तरों में काम की रफ्तार बढ़ेगी. लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. अधिकारियों के पास जनता की शिकायतें सुनने के लिए ज्यादा समय होगा और फाइलों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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