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बिहार चुनाव 2020: अररिया जिले की छह सीटों पर जीत की राह में बागी बने रोड़ा, जानें कहां कौन है परेशान

Updated at : 02 Nov 2020 8:58 AM (IST)
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बिहार चुनाव 2020: अररिया जिले की छह सीटों पर जीत की राह में बागी बने रोड़ा, जानें कहां कौन है परेशान

लोजपा एनडीए के लिए, तो एआइएमआइएम महागठबंधन के लिए और बागी सभी दलों के लिए जीत की राह में रोड़ा बन कर खड़े हैं.

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मृगेंद्र, अररिया : जिले की छह विधानसभा के लगभग 80 प्रत्याशी वोटरों के घर-घर तक पहुंच रहे हैं. मतदाताओं का दर्द है कि बाढ़, कोरोना महामारी के दौरान जो नेता एक छटांक अनाज तक नहीं लेकर पहुंचे थे, वे आज बड़े-बड़े वायदे कर रहे हैं.

इधर, इस बार का समीकरण भी बदल गया है. लोजपा एनडीए के लिए, तो एआइएमआइएम महागठबंधन के लिए और बागी सभी दलों के लिए जीत की राह में रोड़ा बन कर खड़े हैं.

रानीगंज

रानीगंज में एनडीए के घटक दल जदयू से विधायक अचमित ऋषिदेव को पुन: मौका मिला है. महागठबंधन के राजद से अविनाश मंगलम ऋषिदेव उम्मीदवार बनाये गये हैं. लोजपा ने यहां भाजपा से दो बार विधायक रह चुके परमानंद ऋषिदेव को अपना उम्मीदवार बनाया है.

मतलब रानीगंज सुरक्षित सीट से तीन-तीन उम्मीदवार एक ही जाति से संबंध रखते हैं. बावजूद यहां 09 और उम्मीदवार हैं, जो या तो किसी दल से या फिर निर्दलीय उम्मीदवार हैं.

अररिया

क्षेत्र से 12 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. इनमें जदयू से शगुफ्ता अजीम मैदान में हैं. महागठबंधन से कांग्रेस ने वर्तमान विधायक आबिदुर्रहमान को, तो एआइएमआइएम ने राशिद अनवर को अपना उम्मीदवार बनाया है.

लोजपा ने भाजपा के संगठन के पुराने व कद्दावर नेता सह पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह बब्बन को अपना उम्मीदवार बनाया है. एआइएमआइएम के उम्मीदवार महागठबंधन के लिए भी परेशानी खड़ा करने के लिए काफी हैं.

फारबिसगंज

फारबिसगंज विस क्षेत्र से 13 उम्मीदवार मैदान में हैं. महागठबंधन से पूर्व विधायक जाकिर हुसैन खान तो एनडीए के घटक दल भाजपा से विधायक विद्यासागर केसरी उर्फ मंचन केसरी पुन: उम्मीदवार बनाये गये हैं. दोनों दलों के बीच टक्कर सीधी है.

लेकिन ऐसा है नहीं क्योंकि ओबीसी समुदाय के लोगों ने एक बैठक कर दोनों ही बड़े गठबंधन के आलाकमान के फैसलों पर नाराजगी जताते हुए कुछ नया करने का फैसला लिया है. हालांकि, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में हनुमान सेना के पप्पू देव व राजारमण भास्कर उर्फ रंटू मंडल वोट में सेंध करेंगे, तो बागियों का हौसला सबको नुकसान पहुंचायेगा .

नरपतगंज

क्षेत्र से सर्वाधिक 20 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हैं. महागठबंधन से अनील यादव को पुन: नौका पार लगाने की जिम्मेदारी है ,तो पूर्व इंस्पेक्टर जयप्रकाश यादव को भाजपा ने मैदान में उतारा है. हदीश को एआइएमआइएम ने अपना उम्मीदवार बनाया है.

निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व एसडीपीओ अखिलेश कुमार व आरटीआइ एक्टिवीस्ट प्रसेनजीत कृष्ण के अलावा अन्य भी उम्मीदवार हैं. एनडीए उम्मीदवार भी अभी अपनी जड़ों को मजबूत करने में लगे हुए हैं.

जोकीहाट

पूर्व केंद्रीय मंत्री अल्हाज तस्लीमउद्दीन के जोकीहाट के अभेद्य किला में इस बार सेंध लगाने के लिए कुल नौ उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें महागठबंधन (राजद) से पूर्व सांसद मो सरफराज आलम, भाजपा से रंजीत यादव, एआइएमआइएम से विधायक शाहनवाज आलम के अलावा अन्य छह उम्मीदवार हैं.

पहली बार तस्लीम के दो पुत्र आमने-सामने हैं, तो भाजपा ने यहां से रंजीत को टिकट देकर रण जीतने की दावेदारी की है. यहां भी सीट को लेकर जद्दोजहद है.

सिकटी

सिकटी ओबीसी समुदाय के वोटरों का गढ़ माना जाता है. हालांकि वर्तमान समीकरण से पहले दो बार इस सीट पर बीसी कोटे के उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज किया है. इनमें पूर्व विधायक स्व आनंदी प्रसाद यादव का नाम भी शामिल है.

अपने आप को चौथे बार विधायक बनाने में भाजपा विधायक पूर्व राज्यमंत्री विजय कुमार मंडल सफल रहे थे. इस बार वे पांचवीं बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

वहीं राजद के दो बागी कमरूज्जमा, पूर्व विधायक आनंदी प्रसाद के पुत्र अभिषेक आनंद निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं. वहीं एनडीए से बागी हुए भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता राजा मिश्रा भी हैं.

Posted by Ashish Jha

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