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Bihar news: मेवालाल से पहले इन मंत्रियों ने दिया है नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा, जानें क्या रही है वजह

Updated at : 20 Nov 2020 12:08 PM (IST)
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Bihar news: मेवालाल से पहले इन मंत्रियों ने दिया है नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा, जानें क्या रही है वजह

Bihar news, Nitish cabinet: नीतीश कुमार के 15 वर्षों के कार्यकाल में एक नहीं बल्कि करीब आधा दर्जन मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दिया है.

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Bihar news, Nitish cabinet: नीतीश कैबिनेट के सदस्य और पदभार ग्रहण करने के महज दो घंटे बाद पद से इस्तीफा देनेवाले मेवालाल चौधरी नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा देनेवाले अकेले मंत्री नहीं है. नीतीश कुमार के 15 वर्षों के कार्यकाल में एक नहीं बल्कि करीब आधा दर्जन मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दिया है. वैसे मेवालाल मामले में नीतीश कुमार की जमकर किरकिरी हुई है.

नीतीश कुमार के पहले कार्यकाल में ही मंत्री बनने के बाद एक कैबिनेट मंत्री को पद से इस्तीफा देना पड़ा था. नीतीश ने 2005 में अपनी पहली सरकार में जीतन राम मांझी को मंत्री बनाया था. नीतीश कुमार को महज 24 घंटे के भीतर जीतनराम मांझी से इस्तीफा लेना पड़ा था.

दूसरे कार्यकाल में भी नीतीश कुमार ने जिन्हें मंत्री बनाया, उनके दागी होने पर उनसे इस्तीफा लेना पड़ा. रामानंद सिंह को भी नीतीश कैबिनेट से बाहर इसी कारण किया गया. 19 मई, 2011 को कोर्ट द्वारा फरार घोषित होने के बाद सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह ने इस्तीफा दिया था.

नीतीश कुमार के तीसरे कार्यकाल में एक नहीं बल्कि दो मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा था. 2015 में स्टिंग ऑपरेशन में 4 लाख घूस लेते पकड़ाए निबंधन उत्पाद मंत्री अवधेश कुशवाहा ने इस्तीफा दिया. 2018 में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने इस्तीफा दिया था.

मंजू वर्मा के घर से सीबीआई ने तालाशी के दौरान कारतूस बरामद किए थे. हालांकि सीएम नीतीश ने 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में मंजू वर्मा को टिकट भी दिया, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया. इसे लेकर भी कई सवाल खड़े किये गये थे.

नीतीश के चौथे कार्यकाल में भी यह परंपरा कायम रही है. अब इस कड़ी में मेवालाल चौधरी का नाम जुड़ गया है. मेवालाल ने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि ‘मैं अपने पद से त्याग पत्र देता हूं’. जिसके जवाब में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अनुशंसा लिखी है- ‘मैं इनका त्यागपत्र स्वीकृत करने की अनुशंसा करता हूं’.

नीतीश कुमार पर यह सवाल उठ रहे हैं कि 2005 में जीतनराम मांझी का मामला उन्हें ज्ञात नहीं था और अनजाने में उन्हें कैबिनेट में शामिल कर लिया था, लेकिन मेवालाल के मामले में ऐसा नहीं माना जा सकता है.

मेवालाल का मामला नीतीश सरकार के दौरान ही हुआ है और इस मामले की जांच नीतीश कुमार ही करबा रहे हैं फिर उन्हें कैबिनेट में रखने और शिक्षा जैसा विभाग देने का फैसला कैसे लिया गया.

Posted by Ashish Jha

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