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जन्मदिन विशेष: विश्वभर में छाया नीतीश मॉडल, बिहार को मुख्यमंत्री ने दिलाई नयी पहचान, जानें उपलब्धि व प्रयास

CM Nitish Kumar Birthday: आजादी के बाद भारत कई तरह के राजनीतिक परिवर्तन का साक्षी रहा है. इन परिवर्तनों का एक वैचारिक आधार रहा है. भारत संपूर्ण विश्व में ज्ञान की परंपरा के सृजन व वाहक राष्ट्र के रूप में ख्यात है. बिहार इन्हीं वैचारिक मूल्यों की जन्म और पोषक भूमि रही है.

CM Nitish Kumar Birthday: आजादी के बाद भारत कई तरह के राजनीतिक परिवर्तन का साक्षी रहा है. इन परिवर्तनों का एक वैचारिक आधार रहा है. भारत संपूर्ण विश्व में ज्ञान की परंपरा के सृजन व वाहक राष्ट्र के रूप में ख्यात है. बिहार इन्हीं वैचारिक मूल्यों की जन्म और पोषक भूमि रही है. बिहार की इस ज्ञान भूमि को गौतम बुद्ध, महावीर एवं महात्मा गांधी ने सिंचित एवं विकसित किया है. नीतीश कुमार ने अपने सामाजिक सरोकार एवं कार्यों से नये वैचारिक युग की शुरुआत की, जिसकी ज्ञान परंपरा की धारा बिहार की वैचारिक ज्ञान परंपरा से जुड़ती है. उन्होंने राजनीति में मूल्यों के साथ ही भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित किया. उनके नेतृत्व में बिहार ने विकास के नये प्रतिमान गढ़े हैं. उन्होंने बिहार में समावेशी विकास की अवधारणा को मूर्त आकार दिया है.

इस वर्ष यह प्रदेश विकास दर (10.98%) में पूरे देश में तीसरे स्थान पर है. 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नयी सरकार के गठन के साथ ही बिहारवासियों में नयी आशा एवं उम्मीदों का संचार हुआ. उन्होंने क्रमबद्ध तरीके से बिहार के विकास को नयी ऊंचाइयां दीं. सर्वप्रथम ‘कानून का राज’ स्थापित किया. उसके उपरांत, बिहार पहला राज्य बना, जहां ‘महिला केंद्रित’ विकास को बल मिला. उन्होंने पंचायती राज अधिनियम 2006 के तहत राज्य के पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों में 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये. इससे सामाजिक ताने-बाने में चिरप्रतीक्षित एवं सकारात्मक बदलाव दिखने लगा. ज्ञान संपूर्णता में समाज को समृद्ध और सशक्त बनाता है. जब तक महिलाएं शिक्षित एवं जागरूक नहीं होंगी, तब तक समाज मध्ययुगीन जकड़बंदियों से बाहर नहीं निकलेगा. ‘साइकिल’ उत्तरोत्तर विकास के प्रतीक के रूप में बिहार की लड़कियों के जीवन का अंग बना.

प्रदेश में सड़कों के निर्माण ने उनके लिए घर से विद्यालय की दूरी को कम कर दिया. ‘पोशाक योजना’ ने उन्हें आत्मसम्मान का बोध कराया. ‘कानून के राज’ ने उनके लिए स्कूलों और कॉलेजों के सुरक्षित रास्ते खोल दिये. लड़कियों के लिए खुले आकाश ने उनके सपनों को पंख लगा दिया. विकास के इस ‘नीतीश मॉडल’ की केवल देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई. इन सभी योजनाओं के कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिले. प्रदेश में जहां वर्ष 2005 में दसवीं पास करने वाली छात्राओं की संख्या 1.7 लाख थी,जो 2022 में 6.8 (बिहार बोर्ड) लाख हो गयी. स्कूल से दूर रहने वाले बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए ‘संकल्प अभियान’की शुरुआत हुई थी. उसका सार्थक परिणाम प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में देखने को मिला.

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बिहार सरकार द्वारा महिलाओं के विकास और उसके जीवन स्तर में सुधार हेतु कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. उस कार्यक्रम का लाभ यहां के महिलाओं को मिल रहा है. ‘जीविका दीदी’ के माध्यम से बिहार की महिलाएं न केवल केवल साक्षर, बल्कि आर्थिक रूप से समृद्ध और संबल भी बन रही हैं. परिणाम है कि आज बिहार में महिला पुलिस बल की संख्या 29% तक पहुंच गयी है, जो कि राष्ट्रीय औसत से 13% अधिक है. प्रदेश में स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक लड़कियों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था भी की गयी है.

लेखक: डॉ कुमार वरुण, सहायक प्राध्यापक, एएन कॉलेज, पटना

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