ePaper

विधानसभा में उठा EWS उम्र सीमा छूट का मुद्दा, मंत्री ने बताया क्यों नहीं ले सकती बिहार सरकार फैसला

Updated at : 23 Feb 2026 12:48 PM (IST)
विज्ञापन
vijay kumar choudhary

vijay kumar choudhary

Bihar Assembly: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के युवाओं के भविष्य से जुड़ा अहम सवाल उठाया गया. प्रश्नकाल के दौरान विधायक देवेश कांत सिंह ने EWS अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा में छूट देने की मांग की. प्रभारी मंत्री विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य सरकार अपने स्तर पर ऐसा निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है.

विज्ञापन

Bihar Assembly: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में आज प्रश्नकाल के दौरान युवाओं और नौकरीपेशा अभ्यर्थियों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सुर्खियों में रहा. सत्ता पक्ष के ही विधायक देवेश कांत सिंह ने राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में छूट की मांग उठाई.

इस सवाल ने सदन का तापमान बढ़ा दिया, क्योंकि बिहार के हजारों युवा लंबे समय से इस मांग को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से आवाज उठा रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा और कानूनी अड़चनों की परतें खोलीं.

सदन में उठा युवाओं के अवसर का सवाल

प्रश्नकाल में विधायक ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई छात्र आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और सामाजिक दबावों के कारण समय पर तैयारी नहीं कर पाते. ऐसे में वे उम्र सीमा पार कर जाते हैं और नौकरी के अवसर खो देते हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य इस वर्ग को राहत देने पर विचार कर रहा है.

विधायक ने चर्चा के दौरान गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अन्य जगहों पर इस मुद्दे पर विमर्श हो सकता है, तो बिहार में भी इस दिशा में पहल होनी चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य वर्गों को आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ मिलता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी विशेष प्रावधान होना चाहिए.

मंत्री ने बताया कानून की बाध्यता

मंत्री विजय चौधरी ने जवाब में कहा कि EWS से जुड़ा मूल प्रावधान केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत लागू है. इस अधिनियम में आयु सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है और इसमें बदलाव करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य केवल केंद्र के कानून के अनुरूप नियम लागू कर सकता है.

मंत्री ने यह भी कहा कि सदस्य द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सरकार अध्ययन कर सकती है. यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस विषय में कोई संशोधन या दिशा-निर्देश जारी करती है, तो राज्य सरकार उस पर विचार कर सकती है.

अध्ययन की बात पर टिका भरोसा

भले ही मंत्री ने कानूनी सीमाओं का हवाला दिया, लेकिन उन्होंने पूरी तरह दरवाजे बंद नहीं किए हैं. विजय चौधरी ने यह भी कहा कि अगर अन्य राज्यों द्वारा इस तरह की छूट दी गई है, तो सरकार उन तथ्यों और संभावनाओं का अध्ययन करा सकती है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस अधिनियम में कोई संशोधन करती है, तो बिहार सरकार उसे सहर्ष लागू करने पर विचार करेगी. सदन में हुई इस चर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही अभी राहत न मिली हो, लेकिन EWS छात्रों की समस्या अब सरकार की ‘प्राथमिकता सूची’ में शामिल हो गई है.

Also Read: बिहार में अप्रैल से लागू होगी टीचर ट्रांसफर की नई पॉलिसी, अब इतने साल में हो सकेगा तबादला

विज्ञापन
Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन