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धुआं मुक्त होगा बिहार का आंगनबाड़ी केंद्र, अगले माह से लकड़ी की जगह गैस से बनेगा खाना

Updated at : 22 Sep 2023 7:36 PM (IST)
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धुआं मुक्त होगा बिहार का आंगनबाड़ी केंद्र, अगले माह से लकड़ी की जगह गैस से बनेगा खाना

अब तक पोषाहार कार्यक्रम के तहत बच्चों को पोषाहार देने के लिए केंद्रों में लकड़ी का उपयोग होता है. सरकार के निर्णय के बाद विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति पर जिलों से रिपोर्ट मांगी है, ताकि कनेक्शन कैसे और किसके नाम पर दिया जाये. इसको लेकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है.

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पटना. राज्यभर में 115009 स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों में अगले माह से पोषाहार गैस चूल्हा पर बनेगा, जिससे प्रदूषण भी कम होगा. कैबिनेट की मंजूरी मिल जाने के बाद विभाग ने इस पर अमल शुरू कर दिया गया है. अक्तूबर महीने में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों तक गैस चूल्हा पहुंचा दिया जायेगा. अब तक पोषाहार कार्यक्रम के तहत बच्चों को पोषाहार देने के लिए केंद्रों में लकड़ी का उपयोग होता है. सरकार के निर्णय के बाद विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति पर जिलों से रिपोर्ट मांगी है, ताकि कनेक्शन कैसे और किसके नाम पर दिया जाये. इसको लेकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है.

इस कारण से लिया गया गैस सिलिंडर देने का निर्णय

केंद्रों पर भोजन तैयार करने के लिए सेविका-सहायिका द्वारा जलावन के रूप में लकड़ी का उपायोग किया जाता है. लकड़ी पर खाना बनाने से आंगनबाड़ी केंद्र पर धुआं फैलता है. इस कारण बच्चों एवं सेविका-सहायिका का स्वास्थ्य प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है. प्रदूषण भी फैलता है. ऐसी स्थिति में आंगनबाड़ी केंद्रों पर एलपीजी की सुविधा देने की योजना बनायी गयी है.

यह है अनुमानित राशि

सभी केंद्रों पर दो गैस सिलेंडर, चुल्हा की सुविधा दी जायेगी. इसके लिए चौहत्तर करोड़ पचहत्तर लाख अठावन हजार पांच सौ और रिफिलिंग के लिए अनुमानित वार्षिक राशि एक अरब पैंसठ करोड़ पचहत्तर लाख नौ हजार सात सौ आठ रुपये खर्च होने की संभावना है.

क्या कहते हैं मंत्री

समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी मदन सहनी ने इस संबंध में कहा कि अगले माह से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो-दो गैस सिलिंडर दिये जायेंगे. विभाग के स्तर अगले दो दिनों के भीतर प्रारूप तैयार हो जायेगा.जिसमें सिलिंडर किसके नाम पर होगा, रिफिल करने की व्यवस्था और जहां भी केंद्र का संचालन किराये के मकान में होता है. वहां सिलिंडर कैसे सुरक्षित रहे, इसको लेकर जल्द ही अधिसूचना जारी की जायेगी.

कैबिनेट में हुआ था फैसला

19 सितंबर को हुई बिहार राज्य कैबिनेट की हुई बैठक में फैसला लिया गया था कि बिहार के 1 लाख 15 हजार 9 आंगनबाड़ी केंद्रों पर एलपीजी गैस की सुविधा मिलेगी. प्रति केंद्र दो गैस सिलिंडर एवं चूल्हा उपलब्ध कराया जायेगा. इसके लिए 74 करोड़ 55 लाख 58000 रू एवं गैस रिफिलिंग के लिए एक अरब 65 करोड़ 75 लाख 9000 रू व्यय की स्वीकृति दी गई है. आंगनबाड़ी केदो में तीन से 6 वर्ष तक के बच्चों को दिए जा रहे नाश्ते के अतिरिक्त सप्ताह में 2 दिन दूध पाउडर मिलेगा. इसके लिए 232 करोड़ 20 लाख 70 हजार रुपए वार्षिक व्यय की स्वीकृति दी गई है.

मोहनियां में मिला गैस सिलेंडर

पिछले दिनों ही मोहनियां प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में शिविर लगाकर आंगनबाड़ी केंद्र की सेविकाओं को गैस सिलेंडर चूल्हा दिया गया. मोहनियां के एसडीएम शिव कुमार राउत, बीडीओ मनोज कुमार व सीडीपीओ नीरू बाला ने सेविकाओं को चूल्हा और एप्रन दिया. जिला प्रशासन की पहल पर इंडेन गैस के वितरक प्रदीप कुमार पटेल ने सभी सामग्री उपलब्ध कराया. उन्होंने सेविकाओं को गैस चूल्हे के उपयोग के समय बरती जाने वाली सावधानी के बारे में बताया.

हर माह पोषाहार बनाने के लिए मिलता है 650 रुपए

जिला प्रशासन की पहल पर जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को छोटा गैस सिलेंडर गैस चूल्हा उपलब्ध कराया जा रहा है. लकड़ी जलाकर पोषाहार बनाने के समय निकलने वाले धुएं से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है. इससे निजात के लिए गैस चूल्हा का उपयोग जरुरी है. सीडीपीओ नीरू बाला ने बताया की सभी सेविकाओं से रेगुलेटर व दो छोटे गैस सिलिडरों में भरे गैस का पैसा लिया गया. जिसमें 150 रुपए रेगुलेटर, 190 रुपए पाइप व 650 रुपए गैस सिलेंडर पाइप का शुल्क शामिल था. सभी केंद्रों को हर माह पोषाहार बनाने के लिए 650 रुपए मिलता है. अब इसी राशि से गैस पर धुआं रहित पोषाहार बनेगा.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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