बच्ची की मौत के खिलाफ सड़क जाम

मध्याह्न् भोजन खाने के लिए बरतन लाने स्कूल से घर गयी थी वापसी के दौरान बस की चपेट में आयी संवाददाता, पीरो हसनबाजार थाने के हरनाम टोला के समीप आरा -सासाराम स्टेट हाइवे पर मंगलवार की दोपहर एक यात्री बस के कुचल कर कंचन कुमारी (आठ वर्षीया छात्र) की मौत हो जाने से आक्रोशित ग्रामीणों […]
मध्याह्न् भोजन खाने के लिए बरतन लाने स्कूल से घर गयी थी
वापसी के दौरान बस की चपेट में आयी
संवाददाता, पीरो
हसनबाजार थाने के हरनाम टोला के समीप आरा -सासाराम स्टेट हाइवे पर मंगलवार की दोपहर एक यात्री बस के कुचल कर कंचन कुमारी (आठ वर्षीया छात्र) की मौत हो जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर आवागमन ठप कर दिया़ सड़क जाम में शामिल हरनाम टोला के ग्रामीण मृतक छात्र के परिजनों को मुआवजा दिये जाने और वाहनों के अनियंत्रित गति पर नियंत्रण की मांग की. इस दौरान वाहनों की लंबी कतार लग गयी़ जानकारी के अनुसार हरनाम टोला निवासी विजेंद्र चौधरी की आठ वर्षीया पुत्री कंचन कुमारी प्राथमिक विद्यालय हरनाम टोला की छात्र थी़ मंगलवार की दोपहर एमडीएम खाने के लिए स्कूल से अपने घर बरतन लाने गयी थी़ बरतन लेकर वापस स्कूल आने के क्रम में सड़क पार करने के दौरान बिक्रमगंज की ओर से आ रही एक यात्री बस की चपेट में आ गयी़ बस की चपेट में आने के कारण छात्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी़
दूसरी तरफ छात्र की मौत की खबर मिलने के बाद आक्रोशित लोगों ने छात्र के शव के साथ सड़क जाम कर दिया़ ओपी प्रभारी सारंगधर प्रसाद के अलावा एसडीओ मनोज कुमार के नेतृत्व में अधिकारियों का दल पहुंचा और लोगों को समझा कर सड़क जाम को समाप्त कराया़ इस दौरान एसडीओ ने मृतक छात्र के परिजनों को 20 हजार की सहायता राशि दिये जाने का आश्वासन दिया़
स्कूल में थाली होती तो बच जाती कंचन की जान
पीरो. मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय हरनाम टोला की आठ वर्षीया छात्र कंचन की सड़क दुर्घटना में हुई मौत ने स्कूलों में संचालित एमडीएम योजना पर सवाल खड़ा करने के साथ ही कई प्रकार के सवालों को जन्म दिया़ छात्र की मौत के बाद गुस्साये लोगों द्वारा सड़क जाम किये जाने के क्रम में भी इस बात की चर्चा जोरों पर रही कि अगर स्कूल में छात्रों को खाना खिलाने के लिए पर्याप्त संख्या में थाली की व्यवस्था होती, तो मासूम कंचन की जान नहीं जाती़ शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि एमडीएम योजना के तहत सरकार की ओर छात्रों को भोजन देने के लिए स्कूलों में थाली की व्यवस्था करने का प्रावधान किया गया है़ लेकिन थाली खरीदने के लिए पांच वर्ष पूर्व दिये गये आवंटन के बाद इस मद में किसी प्रकार की राशि नहीं दी गयी है़ इस कारण अधिकतर स्कूलों में एमडीएम खाने के लिए छात्र अपने घरों से बरतन लाते हैं.
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