आस्था का प्रतीक है मां महामाया मंदिर

Published at :21 Oct 2015 4:08 AM (IST)
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आस्था का प्रतीक है मां महामाया मंदिर

आरा : मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ग्राम पीपरा में स्थित लगभग हजारों वर्ष पुराना मां महामाया का मंदिर श्रद्धा व आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां शारदीय नवरात्र में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित बिहार के अन्य जगहों से प्रति दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. […]

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आरा : मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ग्राम पीपरा में स्थित लगभग हजारों वर्ष पुराना मां महामाया का मंदिर श्रद्धा व आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां शारदीय नवरात्र में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित बिहार के अन्य जगहों से प्रति दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है.

इस मंदिर को लेकर एक लोक कहावत है कि हजारों वर्ष पूर्व पीपल के घने वृक्षों के बीच धरती की कोख से एक पाषण की उत्पत्ति हुई. शुरू में ग्रामीणों को इस घटना ने चमत्कृत कर दिया. परंतु उन्होंने इसे प्रकृति की एक लीला मानते हुए खारिज करने का प्रयास किया. लेकिन उसी रात चंद ग्रामीणों ने स्वपन में मां महामाया को उनके विराट स्वरूप के साथ देखा. तब से यह स्थल भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बनता गया.

आज भक्तों के सहयोग से अदभूत वस्तु कला से सुसज्जित मां महामाया का मंदिर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इस स्थल पर महान तपस्वी श्री माचा स्वामी जी, अखिलेश स्वामी, श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य श्री जियर स्वामी जी महाराज का आगमन हो चुका है. मान्यता है कि इस मंदिर में नवरात्र में पूजा करने से लोगों की सभी मुरादे पूरी हो जाती है. मंदिर ट्रस्ट के सचिव सुनील सिंह, उमेश सिंह, उमेश सिंह, पशुपतिनाथ, विजेंद्र, अरविंद, दिलीप सिंह आदि सदस्यों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है.

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