क्रय केंद्रों पर बिचौलिये काबिज

Updated at :11 Feb 2015 8:55 AM
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क्रय केंद्रों पर बिचौलिये काबिज

बगैर प्रशासन की सूचना के ही कई धान क्रय केंद्र मिल में हुए स्थानांतरित आरा : जिला प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के उदासीनता के कारण जिले में किसानों को धान बेचने के लिए पैक्स और धान क्रय केंद्रों पर जानवर की तरह खुड़ी काटनी पड़ रही है. वहीं धान क्रय केंद्रों पर बिचौलिये और राइस […]

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बगैर प्रशासन की सूचना के ही कई धान क्रय केंद्र मिल में हुए स्थानांतरित
आरा : जिला प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के उदासीनता के कारण जिले में किसानों को धान बेचने के लिए पैक्स और धान क्रय केंद्रों पर जानवर की तरह खुड़ी काटनी पड़ रही है. वहीं धान क्रय केंद्रों पर बिचौलिये और राइस मिलर इस कदर हावी हो गये है कि किसानों को धान बेचने के लिए नंबर नहीं मिल पा रहे हैं.
ऐसे में किसानों को बिचौलियों और साहुकारों के हाथ औने – पौने दामों पर धान को बेचना पड़ रहा है. इन सबके बावजूद जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारी धान खरीद से बिचौलियों को दूर रखने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
बल्कि अधिकारियों के उदासीनता के कारण धान क्रय केंद्रों पर तैनात किसान सलाहकार और कार्यपालक सहायक बिचौलियों से धान खरीद में सेतु का कार्य कर रहे हैं. जिले में अभी भी धान खरीद की रफ्तार तेज नहीं हो पायी है. धान खरीद का निर्धारित लक्ष्य एक लाख 11 हजार एमटी के विरुद्ध अब तक 19538.04 एमटी धान की खरीद की गयी है. उल्लेखनीय है कि धान खरीद में क्रय केंद्रों पर किसानों से प्रति क्विंटल पलदारी चार रुपया 25 पैसा लिया जाना है, जबकि क्रय केंद्र प्रभारी और मिलर के मिलीभगत से किसानों से जबरन 25 रुपये पलदारी वसूली की जा रही है, जबकि नोडल पदाधिकारी का कहना है कि किसानों से पलदारी के रूप में कोई राशि नहीं लेनी है.
गौरतलब है कि पैक्स को किसान से खरीद किये गये धान को मिल या एसएफसी क्रय केंद्र पर भेजे जाने के दौरान लगने वाले ट्रांसपोटिंग खर्च खुद वहन करनी है. इसको लेकर प्रति क्विंटल पैक्स को 60 रुपये मिलते हैं. बावजूद इसके पैक्स अध्यक्ष किसानों से ट्रांसपोटिंग खर्च बियर करा रहे हैं. वहीं धान खरीद का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जिले में कई धान क्रय केंद्र को बीना डीएम और जिला नोडल पदाधिकारी को सूचना दिये ही जिला प्रबंधक एसएफसी द्वारा मिलों में स्थानांतरित कर दिया गया है. ऐसे में धान क्रय केंद्रों पर धान लेकर पहुंचनेवाले किसानों को धान बेचने को लेकर भाग दौड़ लगानी पड़ रही है. नोडल पदाधिकारी को भी यह जानकारी नहीं है कि जिले में ऐसा भी किया गया है.
जिला प्रबंधक राज्य खाद्य निगम ने कई प्रखंडों के धान क्रय केंद्रों को बंद कर मिलों में स्थानांतरित कर दिया है. इसको लेकर किसानों में जहां आक्रोश पनप रहा है.
वहीं एसएफसी के संरक्षण में मिलरों की धान खरीद में मनमानी चल रही है. ऐसे में किसान ठगी के शिकार हो रहे हैं. फिलहाल एसएफसी ने उदवंतनगर धान क्रय केंद्र को दुलारपुर राइसमिल में और गड़हनी धान क्रय केंद्र को राइसमिल में स्थानांतरित कर दिया है. इसके साथ-साथ कई क्रय केंद्रों को मिलों में स्थानांतरित किये जाने की सूचना है.
धान खरीद के लक्ष्य प्राप्त करना हुआ मुश्किल : जिले में इस वर्ष भी एक लाख 11 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसमें एसएफसी को 22 हजार 200 एमटी और पैक्सो 88800 एमटी धान खरीद का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसमें पैक्स ने अब तक 15098.86 एमटी और एसएफसी ने 4439.18 एमटी धान की खरीद की गयी है.
कहते हैं नोडल पदाधिकारी
जिला नोडल पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त श्यामानंद शर्मा ने कहा कि किसानों से पलदारी के नाम पर कोई राशि नहीं लेनी है. साथ ही पैक्स को ट्रांसपोटिंग खर्च मिल तक पहुंचाने के लिए स्वयं वहन करनी है. उन्होंने कहा कि धान क्रय केंद्र प्रखंड मुख्यालय से मिल में स्थानांतरित किया गया है यह भी मेरी जानकारी में नहीं आयी है. डीडीसी ने कहा कि यदि धान खरीद में किसानों को कोई परेशानी हो रही है और यदि पलदारी के नाम पर 25 रुपये वसूली जा रही है, तो किसान इस संबंध में लिखित शिकायत करेंगे तो जांचोपरांत कार्रवाई की जायेगी.
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