खेतों में डंठल जलाने से उर्वरा शक्ति हुई है कम : डॉ द्विवेदी
Updated at : 22 Nov 2019 7:36 AM (IST)
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आरा : खेतों में अधिक उपज की लालच में किसानों द्वारा उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग व खेतों में पुआल जलाने के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हुई है. इसे सुधारने की आवश्यकता है, ताकि पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे. इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है. कृषि विज्ञान केंद्र व कृभको […]
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आरा : खेतों में अधिक उपज की लालच में किसानों द्वारा उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग व खेतों में पुआल जलाने के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हुई है. इसे सुधारने की आवश्यकता है, ताकि पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे. इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है.
कृषि विज्ञान केंद्र व कृभको द्वारा उर्वरक विक्रेताओं के लिए सहकारिता सप्ताह पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ पीके द्विवेदी संगोष्ठी का विपणन के वरीय राज्य प्रबंधक आरपी पुंडीर, कृभको के वरीय प्रबंधक पीके सिंह के साथ दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करने के बाद उर्वरक विक्रेताओं को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक प्रयोग व खेतों में पुआल नहीं जलाने के लिए जन जागरण की आवश्यकता है. वहीं, यूरिया का कम-से-कम प्रयोग करने की आवश्यकता है.
भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए केंचुआ खाद, हरी खाद, एवं पुआल को खेतों में सड़ाकर खाद बनाने से समस्या का समाधान होगा. इससे खेती का लागत मूल्य भी कम होगा. विपणन के वरीय राज्य प्रबंधक आरपी पुंडीर ने कहा कि रसायनिक उर्वरकों के साथ जैविक उर्वरक एवं उच्च गुणवत्ता युक्त बीज का उत्पादन व विपणन करने के साथ किसानों को जागरूक करने के लिए प्रत्यक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं.
सुप्रिया वर्मा ने कहा कि सब्जी फसलों में पोटाश, बोरान एवं जिंक संतुलित प्रयोग करने से सब्जियों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है. पीके सिंह ने बीजों की उपलब्धता व उत्पादन की जानकारी दी. शशि भूषण कुमार शशी ने मौसम के अनुसार फसलों में लगनेवाले रोगों के बारे में बताया. एसपी सिंह ने बीज उत्पादन में जैविक उर्वरकों तथा एनपीके के संतुलित प्रयोग करने की आवश्यकता है. संचालन व धन्यवाद ज्ञापन पीके सिंह ने किया.
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