कोइलवर : इलाके में बेधड़क दौड़ रहे ओवरलोडेड बालू लदे ट्रकों ने सड़कों की हालत बुरी कर दी है. क्षमता से अधिक लदे बालूवाले ट्रकों ने कोइलवर-डोरीगंज लिंक हाइवे और सकड्डी-नासरीगंज स्टेट हाइवे समेत जिले के सभी एनएच और अन्य सड़कों को बेदम कर दिया है. हालात यहां तक पहुंच गये हैं कि ये सड़कें एक फुट तक धंस गयी हैं और आते-जाते ट्रकों के पहियों के नीचे मिट्टी के रास्तों की तरह लीक बन गया है. साथ ही कई जगहों पर बीच सड़क पर उभार के साथ क्षतिग्रस्त भी हो गयी हैं.
लाल बालू की काली कमाई के लिए होता है ओवरलोड का धंधा : इलाके के इन सड़कों से होकर गुजरनेवाली अधिकांश बालू लदे ट्रकें ओवरलोडेड होते हैं. हालांकि विभागीय आदेश की माने तो वाहनों के हिसाब से ढाई फुट, चार फुट और पांच फुट बालू ही ट्रकों पर ले जाना है. बावजूद इसके क्षमता से अधिक दस-दस फुट तक बालू इन ट्रकों से ले जाया जाता है.
बालू के इस ओवरलोड के खेल में स्थानीय प्रशासन की बड़ी भूमिका है. रोहतास और अरवल से जिले में आनेवाली इन सड़कों से होकर गुजरनेवाले ये ओवरलोडेड ट्रक कई जगहों पर तो थाने के एकदम सामने से गुजरते हैं. बावजूद इसके इन ट्रकों पर स्थानीय पुलिस कार्रवाई करने से हिचकती है.पूछने पर एक पुलिस पदाधिकारी ने बताया कि डीजीपी साहब का आदेश है कि बालू लदे वाहनों को स्थानीय थाना स्तर से रोकटोक नहीं करना है.
हालांकि इस आशय के लिखित आदेश पर कुछ भी पूछने पर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. ओवरलोडेड ट्रकों को जिले की दक्षिणी और पूर्वी सीमा पर अवस्थित सोन नद के घाटों से सहार, अजीमाबाद, संदेश, पवना, गड़हनी, उदवंतनगर, नवादा, नगर, चांदी, कोइलवर बड़हरा समेत अन्य थानों से होकर पड़ोसी जिला बक्सर, पटना और छपरा की सीमा तक पहुंचाने में बजाप्ता एक सिंडिकेट काम करता है, जो इन्हें रास्ते में मिलनेवाले थाने को मैनेज करते हुए सीमा तक पहुंचाता है. वहां से ये उत्तर बिहार समेत उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल के जिलों तक पहुंचते हैं. सोन नद से पूर्वांचल और उत्तर बिहार समेत अन्य जगहों उच्च गुणवत्तावाला होने की वजह से यह बालू मुंहमांगी कीमत पर बिकता है.
जाम भी है सड़क की बर्बादी का कारण
सड़कों पर यहां वहां उभरे गड्ढे और नालीनुमा बने लीक की एक वजह जाम भी हैं. सकड्डी-नासरीगंज स्टेट हाइवे और कोइलवर-डोरीगंज लिंक हाइवे पर बालू लदे ट्रक हजारों की तादाद में लगातार चार से 40 घंटे तक एक ही जगह पर जाम की वजह से खड़े रहते हैं. इनमें बालू लदे वे ट्रकें भी होते हैं जो क्षमता से अधिक लोड होते हैं.
सड़क के एक ही हिस्से पर लगातार पड़ रहे डेडलोड और जाम खत्म होने पर भारी वाहनों के धीरे-धीरे सरकने से सड़कों पर अधिक भार पड़ता है. नतीजतन सड़कें अपनी जगह से एक-एक फुट तक धंस गयी हैं और कई जगहों पर उभर कर क्षतिग्रस्त हो गयी हैं.
इस बाबत जब पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सड़क का निर्माण प्राइवेट कंपनी करा रही है. अभी तक सड़क का हैंड ओवर नहीं हो पाया है. फिर भी कंपनी को निर्देश दिया जायेगा कि टूटे हुई सड़क की मरम्मत करे, अन्यथा कार्रवाई की जायेगी.
बालू के खेल ने निकाल दिया सड़कों का तेल
सहार, अजीमाबाद, संदेश, चांदी, कोइलवर और बड़हरा थाना क्षेत्र में वृहद पैमाने पर बालू का वैध और अवैध उत्खनन हो रहा है. इन्हीं थाना क्षेत्रों से होकर जिले समेत पड़ोसी जिला रोहतास और अरवल के सोन नद के घाटों से बालू लदे ट्रकों का आवागमन सकड्डी-नासरीगंज स्टेट हाइवे, कोइलवर-डोरीगंज लिंक हाइवे और एनएच के जरिये होता है.
इन बालू लदे ट्रकों में अधिकांश ट्रक क्षमता से अधिक ओवरलोडेड होते हैं. क्षमता से अधिक लोड की वजह से सड़कों पर भी अत्यधिक लोड पड़ता है, नतीजतन सड़कें या तो कई जगह क्षतिग्रस्त हो गयी हैं या फिर वे एक फुट तक धंस गयी हैं और उनमें नालीनुमा लीक बन गया है.
