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दो चापाकलों के भरोसे हैं मरीज और उनके परिजन

28 May, 2019 8:16 am
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दो चापाकलों के भरोसे हैं मरीज और उनके परिजन

आरा : जिले का एक मात्र आइएसओ मान्यता प्राप्त सदर अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. हालांकि आइएसओ 9002 से नवाजे जाने के कारण सूबे में इसकी काफी चर्चा भी है लेकिन हकीकत यहां कुछ और ही है. इस अस्पताल में पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज विश्वास के साथ इलाज कराने […]

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आरा : जिले का एक मात्र आइएसओ मान्यता प्राप्त सदर अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. हालांकि आइएसओ 9002 से नवाजे जाने के कारण सूबे में इसकी काफी चर्चा भी है लेकिन हकीकत यहां कुछ और ही है. इस अस्पताल में पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज विश्वास के साथ इलाज कराने आते हैं, लेकिन यहां आने के बाद लोग दोबारा आना पसंद नहीं करते हैं. कारण यह है कि यहां की व्यवस्था प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर है.

वैसे तो यह अस्पताल 300 बेडों का है लेकिन आलम यह है कि गर्मी के दिनों में ये बेड भी मरीजों के लिए कम पड़ जाते हैं. वहीं दो चापाकलों के भरोसे पूरे अस्पताल की पेयजल व्यवस्था टिकी है. हालांकि अस्पताल में जगह-जगह पर आरओ मशीन लगायी गयी हैं, लेकिन सभी आरओ मशीन खराब पड़ी हुई हैं. आलम यह है कि सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के ओटी में दो मशीनें लगी हुई हैं, लेकिन दोनों खराब हैं. ऐसे में मरीजों से लेकर कर्मियों तक को बाहर से खरीद कर पानी पीना पड़ता है. नहीं तो चापाकल का पानी पीने के लिए लोग मजबूर हैं.
इलाज में भी चल रही पैरवी : सदर अस्पताल का आलम यह है कि डॉक्टर ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों को भी पैरवी के बल पर देख रहे हैं. जिन मरीजों की पैरवी नहीं है उनको जैसे-तैसे राम भरोसे छोड़ दिया जा रहा है. वहीं जिन लोगों की जान-पहचान है उनका लाज सही तरीके से किया जा रहा है.
चापाकलों के पास गंदगी का अंबार
इमरजेंसी व प्रसूत वार्ड के बाहर चापाकल लगे हुए हैं, लेकिन वहां पर गंदगी का अंबार है, जिससे लोग वहां पानी लेने के लिए नहीं जा पाते हैं. यही नहीं ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक वार्डों में पानी नहीं है, जिसके कारण मरीजों को बाथरूम जाने में भी परेशानी हो रही है. अस्पताल प्रशासन से शिकायत करने पर खराब होने का हवाला दिया जाता है. कहा जाता है कि इसे जल्द ठीक कर दिया जायेगा, लेकिन यह करीब एक साल यही स्थिति बनी हुई है. अस्पताल के मोटर को जले हुए करीब साल भर हो गया है लेकिन अब तक नहीं बन पाया है. सबसे ज्यादा परेशानी देहाती क्षेत्र से आये लोगों को होती है.
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