दिव्य लोक में तब्दील हुआ यज्ञस्थल

Published at :02 Oct 2017 9:46 AM (IST)
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दिव्य लोक में तब्दील हुआ यज्ञस्थल

पहली बार सवा लाख कलश लेकर एक साथ निकले लोगों ने की जलभरी सैकड़ों की संख्या में हाथी, घोड़ा व ऊंट भी शोभायात्रा में शामिल 11 हजार आचार्य अलग-अलग कुंडों में कर रहे पूजन संजीत उपाध्याय आरा : इन दिनों आरा शहर दिव्य लोक में परिवर्तित हो गया है. पूरी फिजा वैदिक मंत्रोच्चार गूंज रही […]

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पहली बार सवा लाख कलश लेकर एक साथ निकले लोगों ने की जलभरी

सैकड़ों की संख्या में हाथी, घोड़ा व ऊंट भी शोभायात्रा में शामिल

11 हजार आचार्य अलग-अलग कुंडों में कर रहे पूजन

संजीत उपाध्याय

आरा : इन दिनों आरा शहर दिव्य लोक में परिवर्तित हो गया है. पूरी फिजा वैदिक मंत्रोच्चार गूंज रही है. हर कोई इस अावो हवा में शामिल होने को आतुर है.

अयोध्या से आये रामायण कथा वाचक प्रेमभूषण जी महाराज, वृंदावन से आये भागवत कथावाचक श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर जी, श्याम सुंदर परासर जी महाराज की अमृतवाणी को सुनने के लिए लाखों लोग पहुंच रहे हैं. यज्ञ स्थल से संस्कार चैनल पर हो रहे लाइव प्रसारण के बावजूद लोग अपनी आंखों से संतों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं. यज्ञ में आये लोगों ने बताया कि इस ऐतिहासिक यज्ञ में शामिल होकर वे लोग अपने आपको सौभाग्यशाली मान रहे हैं. आज तक इतना भव्य आयोजन नहीं हुआ था. जीयर स्वामी के रूप में साक्षात नारायण इस धरती पर पधारे है, जिनके दर्शन से ही सारे कष्ट दूर हो जा रहे हैं. यूं तो बक्सर में भगवान राम आये थे. इसी वजह से ज्यादातर यज्ञ वहीं पर होते हैं. स्वामी जी का आश्रम भी वहीं पर है, लेकिन चंदवा के यज्ञ ने इतिहास रच दिया. इस यज्ञ को इतिहास में हमेशा से याद रखा जायेगा.

अग्नि मंथन कर यज्ञ का हुआ आगाज : चातुर्मास यज्ञ का आगाज रविवार की शाम तीन तीन बजे अग्नि मंथन कर हुआ. मुख्य यज्ञ शाला में पहले लकड़ी से आग जलायी गयी. इसके बाद 1008 कुंडों से निकला धुआं पूरे फिजा में फैल गया, जिससे की पूरा वातावरण शुद्ध हो गया है. यज्ञ शुरू होते ही परिक्रमा करनेवाले लोगों का तांता लग गया. देश-विदेश से आचार्यों के मंत्रोच्चार से पूरी फिजा भक्तिमय हो गयी. लोग आस्था के सागर में गोते लगाते रहे. यज्ञ में आनेवाला हर सख्त संतों के दर्शन के लिए लालायित थे.

डीएम व एसपी करते रहे मॉनीटरिंग : जिलाधिकारी संजीव कुमार व एसपी अवकाश कुमार पूरे यज्ञ की मॉनीटरिंग प्रशासनिक स्तर से कर रहे हैं. जलभरी के समय ट्रैफिक व्यवस्था में कोई रुकावट न हो इसे ध्यान में रखते हुए डीएम स्वयं पूरी नजर रख रहे थे.

चंदवा में खुला अस्थायी थाना : यज्ञ स्थल पर चंदवा में अस्थायी थाना खोला गया है. बड़े एलसीडी के माध्यम से लोगों पर नजर रखी जा रही है. पूरे यज्ञ स्थल पर विभिन्न जगहों पर 100 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं. इस थाने में महिला व पुरुष दोनों बलों को तैनात किया गया है.

यज्ञ में चोरी करतीं पांच महिलाएं गिरफ्तार : यज्ञ में चोरी करती हुई पांच महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इन महिलाओं पर आरोप है कि भीड़ में शामिल होकर चोरी की है. इसमें से एक महिला आरा की रहनेवाली है. वहीं दो महिलाएं मुगलसराय की रहनेवाली है. इन सभी को नवादा थाने पुलिस को सौंप दिया गया है. पुलिस सबों से पूछताछ कर रही है.

पूरे परिवार के साथ शामिल हुए जनप्रतिनिधि व अधिकारी : यज्ञ की सफलता के लिए पूरे परिवार के साथ जनप्रतिनिधि व अधिकारी शामिल हैं. जलभरी में केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री आरके सिंह, एमएलसी राधाचरण साह उनके भाई हाकिम प्रसाद, बक्सर के सदर विधायक मुन्ना तिवारी, पूर्व विधायक भाई दिनेश, भाजपा के जिला महामंत्री इं धीरेंद्र सिंह, आरा के पूर्व एसपी नवीन चंद्र झा, भाजपा नेता राकेश ओझा, भुवर ओझा सहित अन्य लोग शामिल थे.

सामर्थ्य का नहीं करना चाहिए दुरुपयोग: जीयर स्वामी : आरा. शक्ति सामर्थ्य का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए. अन्यथा परिणाम भोगना पड़ता है.

शास्त्र और इतिहास गवाह है कि जिसने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया उसका हश्र बुरा हुआ. ये बातें श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी ने चंदवा चातुर्मास यज्ञ सह श्री रामानुजाचार्य की सहस्त्राब्दि समारोह में प्रवचन करते हुए कहीं. स्वामी जी ने कहा कि गजेंद्र को 10 हजार हाथियों का बल था. उसने अपने परिजनों के साथ जल में प्रवेश कर उथल-पुथल मचा दिया. जल के जीव विचलित होने लगे और ग्राह ने गजेंद्र को पकड़ लिया. दोनों के बीच शक्ति की आजमाइश हो गयी. गजेंद्र का स्वयं एवं परिजनों की शक्ति का अभिमान चूर हो गया. सभी परिजन छोड़ कर चले गये. देवता भी उसकी गुहार नहीं सुने. आतुर और बेचैन किसी एक पर विश्वास नहीं करते. इसलिए गजेंद्र की मदद में कोई देवता नहीं आये. भगवान जिसकी रक्षा करते हैं. उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे लोग : यज्ञ में शामिल लोगों की सेवा में पूरा शहर ही उतर गया है. जलभरी के समय आम से लेकर खास लोगों ने पानी पिलाने से लेकर पैर पर पानी डालने व पैर दबाने में जुटे रहे. इसके कारण चलते-चलते चुके लोगों में नयी ऊर्जा का संचार हो रहा था. एक नयी ऊर्जा व जोश के साथ श्रद्धालु जीयर स्वामी के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे.

हर कोई सेवा करने के लिए आतुर था. वह इस एेतिहासिक पल का गवाह बनना चाहता था. अलौकिक घटा देखते ही बन रही थी.

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