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Bhagalpur News: जीरोमाइल टू सबौर: वादे भारी, रफ्तार हारी

Updated at : 23 Aug 2025 11:08 PM (IST)
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Bhagalpur News: जीरोमाइल टू सबौर: वादे भारी, रफ्तार हारी

अधूरी सड़क और अधूरे पुल से राहगीर परेशान, एनएच-80 परियोजना बनी सिरदर्द

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– समय सीमा खत्म होने के बाद नौ माह के मिले एक्सटेंशन में छह माह बीता, फिर भी 40 प्रतिशत काम अधूरा

– ढाई साल में हाईवे नहीं बना, एजेंसी को मिली चेतावनी बेअसर, उड़ती धूल ने बढ़ायी मुश्किल- अधूरी सड़क और अधूरे पुल से राहगीर परेशान, एनएच-80 परियोजना बनी सिरदर्द

वरीय संवाददता, भागलपुर

भागलपुर से मिर्जाचौकी तक का सफर आज भी दूभर है. दरअसल, पिछले ढाई साल से बन रही सड़क अब तक अधूरी है. ऐसी स्थिति में यही लग रहा है कि ससमय निर्माण पूरा करने के वादे को कार्य एजेंसी की रफ्तार के कारण हारना पड़ रहा है. मजे की बात यह कि एनएच विभाग जिस एजेंसी से काम करा रही है, उस पर विभागीय चेतावनी का कोई असर नहीं पड़ रहा है. यही वजह है कि कार्य की प्रगति धीमी है. निर्धारित समय दो साल में हाइवे नहीं बना पाने वाली एजेंसी को नौ महीने का टाइम एक्सटेंशन मिला है, जिसमें छह माह बीत चुका है. शेष तीन महीना है और अब तक 40 फीसदी से अधिक कार्य अधूरा है. एनएच-80 की सड़क के इस हिस्से का निर्माण 350 करोड़ से अधिक राशि से हो रहा है.

कार्ययोजना बनने के बाद भी काम में तेजी नहीं

भागलपुर में एनएच-80 के निर्माण में तेजी लाने के लिए कार्य योजना तैयार की गयी है. दो महीने में 17 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य निर्धारित है. बावजूद, काम में न तो तेजी आ रही है और न ही लक्ष्य पूरा हो रहा है. जबकि, एजेंसी की सुविधा के लिए कई बार वन-वे ट्रैफिक की अनुमति दी गयी. ताकि, सड़क निर्माण ट्रैफिक के कारण बाधा नहीं आये.

सबसे खराब स्थिति जीरोमाइल से सबौर के बीच

जीरोमाइल से सबौर के बीच सड़क का अधूरा निर्माण राहगीरों के लिए सिरदर्द बन गया है. सबसे ज्यादा परेशानी इस मार्ग पर स्थित मोहल्ले के लोगों को हो रही है. एक दिन काम होता है और कई दिन बंद रहता है. उड़ती धूल लोगों को बीमार बना रही है.

पुल अधूरा रहने डायवर्सन होकर गुजरने की मजबूरी

सबौर से आगे अभी भी दो पुल का निर्माण अधूरा है और डायवर्सन से गुजरने की मजबूरी बनी है. इस माह में तो बाढ़ का पानी डायवर्सन के लेबल में आने से बड़ी वाहनों का आवागमन पर रोक लगा दी गयी थी.

पहले की एजेंसी नहीं बना सकी थी सड़क

वर्तमान एजेंसी से पहले भी इस सड़क का ठेका पटना के पलक नामक एजेंसी को दी गयी थी. वह मसाढ़ृ में पुल नहीं बना सकी. सड़क का भी निर्माण कई जगहों पर नहीं करा सका. तब यह प्रोजेक्ट 49 करोड़ राशि की थी, जिसमें मसाढ़ू पुल का भी निर्माण कराना था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJIV KUMAR

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SANJIV KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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