bhagalpur news. अंग क्षेत्र का लोक पर्व विशुआ व सिख समाज की बैसाखी आज

Published by :NISHI RANJAN THAKUR
Published at :13 Apr 2026 11:58 PM (IST)
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bhagalpur news. अंग क्षेत्र का लोक पर्व विशुआ व सिख समाज की बैसाखी आज

जिले में दो दिनों तक विभिन्न समाज व समुदाय की ओर से अलग-अलग अवसर पर उत्सव मनाया जायेगा.

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जिले में दो दिनों तक विभिन्न समाज व समुदाय की ओर से अलग-अलग अवसर पर उत्सव मनाया जायेगा. 14 अप्रैल को सिख श्रद्धालुओं की बैसाखी व अंग क्षेत्र का लोक पर्व विशुआ एवं 15 अप्रैल को बंगाली समाज का नववर्ष मनाया जायेगा. विविध समाज व समुदायों का त्योहार व उत्सव का अंदाज अलग-अलग होगा. पकवान भी अलग-अलग होंगे. अंग क्षेत्र का लोक पर्व है विशुआ : बाजार में खूब बिके सत्तू, गुड़, घड़ा व पंखा अंग क्षेत्र के लोक पर्व विशुआ को लेकर बाजार में रौनक दिखी. चना का सत्तू 140 से 160 रुपये किलो, जौ का 100 से 120 रुपये किलो, मकई का 80 से 100 रुपये किलो, सामान्य गुड़ 50 रुपये किलो, सूखा 60 से 80 रुपये किलो, टिकोला 60 से 80 रुपये किलो तक बिके. संस्कृतिकर्मी विजय झा गांधी ने बताया कि विशुआ पर्व में सत्तू गुड़ का भोजन ग्रहण करेंगे. सामान्य विशुआ व्रती उस दिन सत्तू गुड़ का ही भोजन करते हैं. विशुआ के रात्रि में भोजन बना कर दूसरे दिन बासी भोजन खाने की मान्यता है. गौ पालक का रिवाज है कि विशुआ के दिन वह दूध नहीं बेचते हैं और गाय-भैस के संरक्षक देवता बाबा विशु राउत को सभी दूध चढ़ा देते हैं. इसे गर्मियों की शुरुआत भी माना जाता है. गांवों में भरथरी(भतृर्हरि) का गुण गाया जायेगा, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा की जायेगी. ———– आज गुरुद्वारा समेत घर-घर मनेगी बैसाखी गुरुद्वारा में बैसाखी उत्सव मनाया जायेगा. सिख समुदाय में वैशाखी उत्सव का विशेष महत्व है मीडिया प्रभारी सरदार हर्षप्रीत सिंह ने बताया कि मुख्य बाजार स्थित गुरुद्वारा में एक सप्ताह से शबद कीर्तन हो रहा है. इस दिन विशेष कीर्तन व लंगर का आयोजन होगा. सरदार हर्षप्रीत सिंह बताते हैं कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली आदि स्थानों पर सिख बहुल क्षेत्र में बैसाखी मेला लगता है. इस दौरान लड़के तलवारबाजी, घुड़सवारी व भांगड़ा नृत्य करते हैं, तो लड़कियां गिद्धा नृत्य करती हैं. 1699 में गुरु गोविंद सिंह ने वैशाखी के दिन देश की एकता, अखंडता व धर्म निरपेक्षता के लिए पंज प्यारे को अमृत पिला कर जीवित करने का कार्य किया. इसे तभी से साधना दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं. —————– बंगाली समाज का नववर्ष : सजती है रंगोली, गले मिलते हैं समाज के लोग शहर के अलग-अलग हिस्सों में बसे बंगाली समाज के लोग 15 अप्रैल को बांग्ला नववर्ष मनायेंगे. सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष बनर्जी ने बताया कि 15 अप्रैल को बंगाली परिवार का नया साल का प्रारंभ माना जाता है. इस दिन बंगाली परिवार नया परिधान पहन कर देवी देवता का पूजा करने के उपरांत बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के लिए एक दूसरे के घर आया जाया करते हैं. यह परंपरा काफी पुरानी है. महिलाओं द्वारा घर में रंगोली सजायी जाती है. पूरे बंगाली बहुल क्षेत्र में उत्सवी माहौल होता है. सभी के घरों में तरह-तरह के व्यंजन, जिसमें मछली के अलग-अलग वेराइटी माछेर पातुड़ी, माछेर कलिया, मुड़ी घोंतो आदि व मिठाई व शाकाहारी भोजन तैयार किये जाते हैं. दूसरे सामाजिक कार्यकर्ता तरुण घाेष ने बताया कि इस दिन तरह-तरह के अनुष्ठान का कार्यक्रम रखे जाते हैं. विशेष कर रविंद्र संगीत का कार्यक्रम बहुत अहम होता है. इसी वैशाख की 25 तारीख को कवि गुरु रविंद्र नाथ ठाकुर का जन्मदिन मनाया जाता है.

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